ब्रजेश दुबे की रिपोर्ट
विश्रामपुर (पलामू). विश्रामपुर प्रखंड का सुदूरवर्ती घासीदाग पंचायत आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. पहाड़ की तलहटी में बसे इस पंचायत के किसी भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है. बारिश के कारण कजरू कला से घासीदाग जाने वाला करीब सात किलोमीटर का कच्चा रास्ता कई जगह पानी के तेज बहाव में बह गया है, जबकि कई हिस्से कीचड़ में तब्दील हो चुके हैं. इससे पंचायत में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
प्रखंड मुख्यालय से घासीदाग की दूरी 25 किमी
घासीदाग पंचायत की भौगोलिक स्थिति भी इसके पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण है. पंचायत तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है. यहां पहुंचने के लिए लोग पहले करीब 18 किलोमीटर दूर पांडू प्रखंड के कजरू कला जाते हैं. इसके बाद करीब सात किलोमीटर कच्चे रास्ते से घासीदाग पहुंचते हैं. लगातार बारिश के कारण यही रास्ता कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया है. इससे प्रखंड और जिला मुख्यालय से पंचायत का संपर्क लगभग टूट गया है.
धुरिया नदी पर पुल नहीं
घासीदाग पंचायत के दो तरफ से धुरिया नदी बहती है. लगातार बारिश के कारण नदी उफान पर है. नदी पर पुल नहीं होने के कारण पंचायत के पांचों गांव एक-दूसरे से कट गए हैं. इसका असर बच्चों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है. मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे नदी और खराब रास्ते के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भी अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है.
आदर्श ग्राम के चयन के सात साल बाद भी हालात जस के तस
पलामू लोकसभा क्षेत्र के सांसद विष्णु दयाल राम ने वर्ष 2019 में पहली बार सांसद बनने के बाद घासीदाग गांव को सांसद आदर्श ग्राम के रूप में गोद लिया था. लेकिन सात साल बाद भी पंचायत की तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है. पंचायत में केवल एक मध्य विद्यालय है. कोई उच्च विद्यालय नहीं है. आठवीं कक्षा के बाद बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर पांडू कल्याण उच्च विद्यालय जाना पड़ता है. पंचायत में करीब पांच वर्ष पहले स्वास्थ्य भवन का निर्माण कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक वहां न चिकित्सक पहुंचे और न ही स्वास्थ्यकर्मी की नियमित व्यवस्था हो सकी है.
20 साल पहले एक बार विधायक गए थे पंचायत
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में जिला प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही बेहद कम है. ग्रामीणों के अनुसार सांसद विष्णु दयाल राम तीन बार सांसद बनने के बाद यहां केवल दो बार पहुंचे हैं. इससे पहले कोई सांसद पंचायत में नहीं आया था. वहीं विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी करीब 20 वर्ष पहले वर्ष 1995 में एक एनपीएस स्कूल भवन के शिलान्यास के लिए यहां पहुंचे थे.
उग्रवाद और भौगोलिक स्थिति भी बनी विकास में बाधा
ग्रामीणों के अनुसार घासीदाग पंचायत के पिछड़ेपन में इसकी भौगोलिक स्थिति के साथ उग्रवाद भी एक कारण रहा है. पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यह इलाका कभी माओवादी नक्सलियों तो कभी टीपीएससी उग्रवादियों की गतिविधियों से प्रभावित रहा. सड़क और पुल की कमी के कारण पुलिस की पहुंच भी यहां सीमित रही, जिससे लंबे समय तक पंचायत का विकास प्रभावित रहा.
सड़क बने तो खुलेगा विकास का रास्ता
ग्रामीण अमित कुमार ने कहा कि आज भी ऐसा लगता है कि वे पाषाण युग में जीवन जी रहे हैं. पंचायत की स्थिति देखकर नहीं लगता कि यह विकासशील भारत का हिस्सा है. उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से पंचायत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की. रविकांत रवि ने कहा कि घासीदाग को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सबसे पहले सड़क का निर्माण जरूरी है. रामकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि विधायक, सांसद, जिला प्रशासन और सरकार ने ग्रामीणों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है. ग्रामीण महिलाएं मीना देवी और चिंता देवी ने कहा कि सड़क नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई के साथ शादी-विवाह में भी परेशानी होती है. उन्होंने सबसे पहले सड़क निर्माण की मांग की.
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मुखिया बोलीं- सड़क ही विकास का पहला आधार
पंचायत की मुखिया अंजू कुमारी ने कहा कि सड़क विकास का असली पैमाना है. जब तक पंचायत सड़क मार्ग से नहीं जुड़ेगी, तब तक विकास की कल्पना करना मुश्किल है. सड़क बनने के बाद विकास के कई रास्ते अपने आप खुलेंगे. उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर पलामू सांसद, स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिया गया है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन मिला है. उन्होंने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है. मुखिया ने कहा कि पंचायत को जोड़ने के लिए दो रास्तों पर काम जरूरी है. पहला कजरू कला से घासीदाग तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए. दूसरा, नावाबाजार से मुसीखाप तक स्वीकृत सड़क को काला कजरु होते हुए कुंभी कला सिवान तक बढ़ाया जाए.
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फैक्ट फाइल
घासीदाग पंचायत में घासीदाग, जमारी, कोड़िया, भूखला, राजखड़ और झांटीनाथ समेत पांच गांव शामिल हैं. पंचायत की कुल आबादी करीब 6500 है, जबकि कुल मतदाताओं की संख्या करीब 3700 है. पंचायत में दलित, आदिवासी और ओबीसी आबादी की बहुलता है. राजखड़ गांव में आदिम जनजाति की आबादी अधिक है. पूरे पंचायत में अगड़ी जाति का केवल एक परिवार रहने की बात बताई गई है.
