हुसैनाबाद. कल जो चमन था, आज सेहरा हुआ, देखते-देखते क्या हो गया.’ ये पंक्तियां हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र की जपला सीमेंट फैक्ट्री पर सटीक बैठती हैं. कभी विश्व में अपनी पहचान रखने वाली यह फैक्ट्री आज वीरान पड़ी है. फैक्ट्री बंद होने के बाद भी इससे जुड़ी यादें यहां के लोगों और आवासीय परिसर में रहने वाले परिवारों के जेहन में ताजा हैं.
17 सितंबर को ‘कारखाना फ्री’ के नाम से मशहूर था दिन
17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन जपला सीमेंट फैक्ट्री में खास रौनक रहती थी. सुबह आठ बजे मुख्य गेट आम लोगों के लिए खोल दिया जाता था. फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और मजदूरों के परिवार के साथ आसपास के लोग भी फैक्ट्री देखने पहुंचते थे. इसी कारण यह दिन ‘कारखाना फ्री’ के नाम से मशहूर था. पावर प्लांट, क्लिन डिपार्टमेंट, पैकिंग प्लांट, वर्कशॉप, ट्रांसपोर्ट और लेबोरेट्री समेत सभी विभागों में करीब दस दिन पहले से सजावट शुरू हो जाती थी.
डेंजर जोन में तैनात रहते थे सुरक्षा कर्मी
विश्वकर्मा पूजा के दिन फैक्ट्री में काफी भीड़ जुटती थी. परिसर में कई डेंजर जोन थे, जहां लोगों को जाने से रोकने के लिए सुरक्षा कर्मी तैनात रहते थे. फैक्ट्री की नीलामी के बाद बड़ी मशीनें और पार्ट्स स्क्रैप में बिक गये. अब वहां जमीन, विशाल दीवारें और कुछ पुराने खंडहर ही बचे हैं. कभी फैक्ट्री में काम करने वाले बुजुर्ग आज भी उन दिनों को याद कर भावुक हो जाते हैं. उनके लिए फैक्ट्री का खत्म होना सिर्फ एक उद्योग का बंद होना नहीं, बल्कि एक गौरवशाली इतिहास का अंत है.
