प्रतिनिधि, सतबरवा पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड में स्थित मुरमा कठौतिया मलय डैम सतबरवा, लेस्लीगंज और मेदिनीनगर प्रखंड के लगभग 105 गांवों के किसानों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है. डैम के पानी से करीब 2200 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है और इससे किसानों के खेतों में हरियाली व घरों में खुशहाली आती है. हालांकि, मलय डैम की मुख्य नहर का चैन संख्या 18, 10 नवंबर 2025 को पानी के दबाव के कारण टूट गया था. इसके परिणामस्वरूप दर्जनों किसानों के धान की फसल बर्बाद हो गयी थी. करीब आठ माह बीत जाने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से किसानों में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है. अब खरीफ फसल की बुवाई का समय नजदीक है, लेकिन नहर के पटवन पानी को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. किसानों ने विभाग के रवैये पर नाराजगी जतायी है. ठेमा, पोंची और लहलहे गांव के किसान संजय यादव, विनोद यादव, आशीष सिन्हा, सुशील सिंह और पंकज तिवारी ने कहा कि अगर नहर की मरम्मत जल्द शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन किया जायेगा. पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मामले को गंभीरता से लेने की मांग ग्रामीणों ने डीसी पलामू दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से इस जनहित के मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है. राज्य स्तरीय दिशा समिति के सदस्य अवधेश सिंह चेरो ने बताया कि नहर टूटने के कारण पटवन का पानी नहीं मिल रहा है, जिससे रवि फसल का नुकसान हो चुका है. अब खरीफ फसल के समय में किसानों की चिंता जायज है. उन्होंने सांसदों और स्थानीय विधायकों के साथ डीसी और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को भी इस स्थिति से अवगत कराया है और नहर मरम्मत कार्य की जल्द शुरुआत की मांग की है. नहर मरम्मत का प्राक्कलन तैयार ,जल्द होगी टेंडर की प्रक्रिया : ईई जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता (ईई) सुशील बिरुआ ने बताया कि मलय डैम का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था और उसी समय पांच किमी तक नहर का निर्माण किया गया था, जो अब जर्जर होने के कारण चैन संख्या 18 पर टूट गयी है. उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप का उपयोग किया जा रहा है. नहर के मरम्मत कार्य के लिए प्राक्कलन तैयार है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही कार्य शुरू कर दिया जायेगा.
मलय डैम की नहर टूटने से किसानों में चिंता, खरीफ फसल पर संकट
मलय डैम की नहर टूटने से किसानों में चिंता, खरीफ फसल पर संकट
