पलामू में झारखंड की उप-राजधानी बनाने की उठी मांग

महात्मा गांधी के पलामू आगमन‘के शताब्दी वर्ष पर गोष्ठी का आयोजन

महात्मा गांधी के पलामू आगमन‘के शताब्दी वर्ष पर गोष्ठी का आयोजन

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

शहर के ग्रिन वैली इंटरनेशनल स्कूल में रविवार को विचार गोष्ठी हुआ. ज्ञान-विज्ञान समिति ने इसका आयोजन किया. गोष्ठी की अध्यक्षता शिव शंकर प्रसाद ने की. संचालन प्रेम प्रकाश ने किया. विषय प्रवेश कराते हुए पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान संघर्ष की एकजुटता को सशक्त बनाने के उदेश्य से 11 जनवारी 1927 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पलामू आये थे. उनके साथ इस यात्रा में डॉ राजेंद्र प्रसाद भी थे. जिला मुख्यालय मेदिनीनगर (डालटनगंज) शहर के कन्नीराम चौक स्थित मारवाड़ी पुस्तकालय में दोनों महापुरूष पहुंचे. पुस्तकालय के आगंतुक पंजी में दोनों महापुरुषों का हस्ताक्षर दर्ज है. उन्होंने कहा कि गांधीजी को स्मरण करते हुए मेदिनीनगरो को झारखंड की उप-राजधानी बनाने की आवश्यकता है, ताकि पलामू प्रमंडल गौरवान्वित हो सके. इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार ने कहा कि पूरे विश्व में साम्राज्यवाद, युद्ध व हिंसा का माहौल है. ऐसे समय में बापू के सत्य, अहिंसा व मानवता के सिद्धांत की प्रासंगिकता बढ़ जाती है. विद्यालय के निदेशक प्रदीप कुमार ने कहा कि पलामू ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव से समृद्ध क्षेत्र है. मेदिनीनगर को उप-राजधानी का दर्जा मिलने से यहां के नागरिकों को सम्मान के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं भी प्राप्त होंगी. अजय कुमार ने बापू के आगमन के शताब्दी वर्ष के तहत कार्यक्रम के आयोजन व झारखंड की उप राजधानी बनाने को लेकर संगठित होने की आवश्यकता है. इसके लिए समन्वय समिति का गठन किया जाना चाहिए. शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि समाज में हिंसा, नफरत व अधर्म का बाेलबाला है. ऐसे समय में पलामू में बापू के सत्य व अहिंसा की राजनीति को समाज में पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है. मौके पर संजय कुमार, गोविंद प्रसाद, शीला श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किया. गोष्ठी में वैजयंती गुप्ता, वीणा राज, पल्लवी, प्रदीप कुमार, संजीव कुमार, रवि शंकर सहित कई लोग मौजूद थे.

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By Akarsh Aniket

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