पलामू: करोड़ों की लागत से बना आवास परिसर बेकार, अधिकारी मुख्यालय छोड़ शहर से कर रहे आवागमन

Palamu News: पलामू के पाटन प्रखंड में करोड़ों की लागत से बना नवनिर्मित आवास परिसर पिछले एक साल से बेकार पड़ा है. अधिकारी मुख्यालय में रहने के बजाय जिला शहर से आ-जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

पाटन से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट 

Palamu News: पलामू जिले के पाटन प्रखंड परिसर में निर्मित दो मंजिला नवनिर्मित अधिकारी आवास पिछले एक वर्ष से बंद पड़ा है. बिजली और पानी सहित अन्य आवासीय पूर्ण व्यवस्था होने के बावजूद इस सरकारी भवन में कोई रहने वाला नहीं है नतीजतन ताला लटक रहा है. राज्य सरकार के सख्त नियमों के अनुसार सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से प्रखंड मुख्यालय में ही निवास करना है. इसके बावजूद बीडीओ, सीओ, सीडीपीओ और पशुपालन विभाग के अधिकारी जिला मुख्यालय मेदिनीनगर या अपने निजी घरों से प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं. इस मनमानी के कारण जहां करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है, वहीं सुदूर क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

 नियमों का हो रहा पूरी तरह से उल्लंघन

सरकारी नियमों और जांच के डर से बचने के लिए पूर्व में कुछ अनोखे तरीके भी अपनाये गये. जब सरकार के आदेश के बाद जिला के वरीय पदाधिकारियों ने दबाव बनाया तो पूर्व बीडीओ सोमनाथ बनर्जी ने प्रशासनिक कार्रवाई और जिला स्तरीय अधिकारियों के औचक निरीक्षण से बचने के लिए पाटन में किराये पर एक कमरा ले रखा था. हालांकि, वह इस कमरे में कभी रुके नहीं और इसका उपयोग केवल जांच के दौरान दिखावे के लिए किया जाता था.वर्तमान समय में करोड़ों की लागत से तैयार इस चार इकाई वाले आधुनिक शासकीय परिसर को पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी को दर्शाता है.

अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीण परेशान, कामकाज ठप

अधिकारियों के प्रखंड मुख्यालय में न रहने के कारण कार्यालय में उनके आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है. पाटन प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से आने वाले ग्रामीण दिनभर कार्यालय परिसर में इंतजार करने के बाद शाम को निराश होकर खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं. जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र या अन्य आवश्यक राजस्व संबंधी साधारण कार्यों के लिए भी जनता को एक सप्ताह से अधिक समय तक भटकना पड़ रहा है.

जवाबदेही का अभाव बढ़ रहा है जन असंतोष

इस प्रशासनिक अव्यवस्था को देखने या सुनने वाला कोई नहीं है.स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे इस अनियमितता को लेकर अधिकारियों से सवाल करते हैं, तो उन्हें संतोषजनक उत्तर देने के बजाय प्रताड़ित किया जाता है.अधिकारियों द्वारा यह तक कह दिया जाता है कि उनका कोई मालिक नहीं है और ग्रामीणों को पूछताछ करने का कोई अधिकार नहीं है. मुख्यालय से अधिकारियों की लगातार दूरी के कारण क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम जनता में प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ गहरा असंतोष व्याप्त है.

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लेखक के बारे में

By Priya gupta

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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