प्रतिनिधि, लिट्टीपाड़ा लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने रविवार को प्रेस वार्ता कर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया भाजपा की वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक, ईसाई और आदिवासी समुदाय के मतदाताओं को प्रभावित करना है. विधायक ने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ का मुद्दा उठाया जा सकता है, लेकिन आदिवासी बहुल लिट्टीपाड़ा क्षेत्र में इसकी संभावना बेहद कम है. यहां बाहरी व्यक्ति के आने पर स्थानीय लोग उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी रखते हैं. उन्होंने कहा कि एसआइआर के नाम पर मतदाताओं में भ्रम पैदा किया जा रहा है और आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में ग्रामीण व गरीब लोगों को परेशानी हो सकती है. हेमलाल मुर्मू ने बताया कि झामुमो ने प्रत्येक बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की है और उनकी सूची चुनाव आयोग को भेज दी गई है. जल्द ही तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देगी, ताकि मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों को रोका जा सके. उन्होंने आरोप लगाया कि पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है. साथ ही सरना और सनातन धर्म की अलग पहचान बनाए रखने की बात कही. विधायक ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे पर राज्य स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा. उन्होंने मतदाताओं से सतर्क रहने और अपने आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील की.
एसआइआर से आदिवासी और अल्पसंख्यकों के मताधिकार पर खतरा: विधायक
लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया को भाजपा की वोट बैंक राजनीति करार देते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अल्पसंख्यक, ईसाई और आदिवासी मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने मतदाताओं में भ्रम और ग्रामीणों की दिक्कतों पर चिंता व्यक्त की। झामुमो ने चुनाव सुरक्षा के लिए कार्यकर्ताओं की सूची भेजी है और प्रशिक्षण का आयोजन होगा। उन्होंने आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं धर्म की अलग पहचान बनाए रखने पर जोर दिया।
