नगर प्रतिनिधि, पाकुड़: संथाल परगना में परिवार नियोजन के तहत नसबंदी को लेकर सामने आए आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं. NFHS-5 (2019-21) और NFHS-6 (2023-24) के आंकड़ों की तुलना में प्रमंडल के छह जिलों में से चार में महिला नसबंदी की दर में गिरावट दर्ज की गयी है. वहीं, पुरुष नसबंदी की स्थिति और भी कमजोर है. छह में से किसी भी जिले में पुरुष नसबंदी की दर एक प्रतिशत तक नहीं पहुंची.
महिला नसबंदी की दर में सबसे बड़ी गिरावट पाकुड़ में दर्ज की गयी, जहां यह आंकड़ा 32.5 प्रतिशत से घटकर 18.3 प्रतिशत रह गया.
पाकुड़ में 14.2 प्रतिशत अंक की सबसे बड़ी गिरावट
NFHS-5 के मुकाबले NFHS-6 में महिला नसबंदी की दर में सबसे ज्यादा गिरावट पाकुड़ जिले में हुई है. यहां दर 32.5 प्रतिशत से घटकर 18.3 प्रतिशत हो गयी. यानी 14.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गयी.
इसके बाद गोड्डा और जामताड़ा में भी उल्लेखनीय गिरावट सामने आयी. गोड्डा में महिला नसबंदी की दर 38.0 प्रतिशत से घटकर 28.5 प्रतिशत, जबकि जामताड़ा में 35.3 प्रतिशत से घटकर 27.1 प्रतिशत रह गयी.
देवघर में भी महिला नसबंदी की दर में कमी आयी है. यहां यह आंकड़ा 40.1 प्रतिशत से घटकर 35.6 प्रतिशत हो गया.
दुमका और साहिबगंज में बढ़ी महिला नसबंदी
छह जिलों में सिर्फ दुमका और साहिबगंज ऐसे रहे, जहां महिला नसबंदी की दर में वृद्धि दर्ज की गयी.
दुमका में यह दर 28.4 प्रतिशत से बढ़कर 31.1 प्रतिशत हो गयी. वहीं साहिबगंज में 23.2 प्रतिशत से बढ़कर 24.6 प्रतिशत दर्ज की गयी.
इस तरह NFHS-5 और NFHS-6 की तुलना में संथाल परगना के छह जिलों में चार जिलों में गिरावट और दो जिलों में वृद्धि हुई.
पुरुष नसबंदी की स्थिति बेहद कमजोर
परिवार नियोजन में पुरुष नसबंदी के आंकड़े और भी कम हैं. NFHS-6 के अनुसार गोड्डा 0.5 प्रतिशत के साथ छह जिलों में सबसे आगे रहा.
इसके बाद देवघर और दुमका में पुरुष नसबंदी की दर 0.3-0.3 प्रतिशत, पाकुड़ में 0.2 प्रतिशत और जामताड़ा में महज 0.1 प्रतिशत रही. साहिबगंज में पुरुष नसबंदी की दर शून्य दर्ज की गयी.
यानी छह जिलों में से किसी भी जिले में पुरुष नसबंदी की दर एक प्रतिशत तक नहीं पहुंची.
तीन जिलों में पुरुष नसबंदी में मामूली बढ़ोतरी
NFHS-5 से तुलना करने पर देवघर में पुरुष नसबंदी की दर 0.2 प्रतिशत से बढ़कर 0.3 प्रतिशत, दुमका में 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 0.3 प्रतिशत और गोड्डा में 0.3 प्रतिशत से बढ़कर 0.5 प्रतिशत हुई.
जामताड़ा में यह आंकड़ा 0.1 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जबकि पाकुड़ में 0.2 प्रतिशत पर कोई बदलाव नहीं हुआ. साहिबगंज में दोनों सर्वेक्षणों में पुरुष नसबंदी की दर शून्य रही.
महिला नसबंदी का औसत भी हुआ कम
छह जिलों के उपलब्ध आंकड़ों का साधारण औसत निकालने पर NFHS-5 में महिला नसबंदी की दर करीब 32.9 प्रतिशत थी, जो NFHS-6 में घटकर करीब 27.5 प्रतिशत रह गयी.
हालांकि, यह संथाल परगना का आधिकारिक संयुक्त आंकड़ा नहीं है. यह सिर्फ छह जिलों के उपलब्ध आंकड़ों का साधारण औसत है.
आंकड़ों की तुलना से एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आती है कि संथाल परगना में परिवार नियोजन के मामले में महिला और पुरुष नसबंदी के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. खासकर पुरुष नसबंदी की बेहद कम दर परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े करती है.
