पाकुड़: दिल्ली पब्लिक स्कूल, पाकुड़ में 20 से 28 जुलाई तक संस्कृत भाषा महोत्सव का सफल आयोजन किया गया. सप्ताहभर चले इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, सम्मान और व्यवहारिक ज्ञान विकसित करना था. विभिन्न गतिविधियों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
महोत्सव का शुभारंभ प्रार्थना सभा में संस्कृत भाषा के महत्व पर आधारित प्रेरक संबोधन के साथ हुआ. विद्यार्थियों को बताया गया कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला है तथा इसके संरक्षण की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की भी है.
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संस्कृत में दैनिक अभिवादन, वर्णमाला, संख्याएं और संस्कृत में हस्ताक्षर करना सीखा. इससे उन्हें भाषा को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिली. एक विशेष सत्र में कर्नाटक के मत्तूर और होसहल्ली, मध्य प्रदेश के झिरी तथा राजस्थान के गनोड़ा जैसे संस्कृत भाषी गांवों का वर्चुअल भ्रमण कराया गया. इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना कि आज भी इन गांवों में संस्कृत सामान्य बोलचाल की भाषा के रूप में प्रयोग की जाती है.
समापन दिवस पर स्थानीय व्यंजन, मसाले, फल और सब्जियों के संस्कृत नामों पर आधारित गतिविधि आयोजित की गई. इससे विद्यार्थियों की शब्दावली समृद्ध हुई और संस्कृत को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का अवसर मिला.
विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत की पहचान है. वहीं प्रधानाचार्य जे. के. शर्मा ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में भाषा कौशल, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों और आयोजन समिति की सराहना की. महोत्सव के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
