प्रतिनिधि, पाकुड़. पाकुड़-हिरणपुर मुख्य मार्ग पर सोनाजोड़ी सदर अस्पताल के कुछ ही दूरी पर सड़क किनारे बना गोकुल ग्राम विकास केंद्र इन दिनों बदहाली का शिकार है. वर्षों से बंद पड़ा यह भवन घनी झाड़ियों में पूरी तरह छिप गया है. भवन की अनदेखी से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है. यहां असामाजिक तत्वों के जमावड़े की आशंका भी बढ़ गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण भवन की नियमित देखरेख नहीं हो पा रहा है. परिणामस्वरूप परिसर में झाड़ियां उग आई है और भवन जर्जर होने लगा है. पशुपालन विभाग के अनुसार, गोकुल ग्राम विकास केंद्र एक कृत्रिम गर्भाधान केंद्र था, जो पहले पशुपालन विभाग से संचालित होता था. बाद में इसका संचालन गव्य विकास विभाग की देखरेख में किया जाने लगा. यह केंद्र बायफ नामक एनजीओ द्वारा संचालित किया जाता था. करीब चार से पांच वर्ष पूर्व केंद्र का संचालन बंद हो गया. मामले में पशुपालन पदाधिकारी डॉ नीरज कुमार ने बताया कि उक्त भवन में बायफ एनजीओ द्वारा कृत्रिम गर्भाधान केंद्र संचालित किया जाता था. यह गव्य विकास विभाग से संबंधित था. वहीं गव्य विकास विभाग के अधिकारी डॉ अनिल कुमार ने बताया कि केंद्र करीब 4 से 5 वर्ष पूर्व बंद हो चुका है. कहा कि उक्त भवन की मांग मेधा डेयरी की ओर से की गयी है. इस संबंध में विभागीय स्तर पर विचार किया जा रहा है.
पांच वर्षों से बंद पड़ा है गोकुल ग्राम विकास केंद्र, उगी झारियां
पाकुड़. पाकुड़-हिरणपुर मुख्य मार्ग पर सोनाजोड़ी सदर अस्पताल के कुछ ही दूरी पर सड़क किनारे बना गोकुल ग्राम विकास केंद्र इन दिनों बदहाली का शिकार है.
