ईस्टर संडे: पूर्वजों की कब्र पर जलाये कैंडिल, गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं

ईस्टर संडे: पूर्वजों की कब्र पर जलाये कैंडिल, गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं

नगर प्रतिनिधि, पाकुड़: जिले भर में ईस्टर पर्व आस्था, श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया गया. इस अवसर पर विभिन्न गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया गया, वहीं कब्रिस्तानों में जाकर लोगों ने अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की. सुबह से ही चर्चों और कब्रिस्तानों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. सबसे पहले लोगों ने कब्रिस्तान जाकर अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर फूल चढ़ाए, अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाकर उन्हें याद किया. कब्रिस्तान में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जिसमें जीवन, मृत्यु और पुनर्जीवन के गूढ़ संदेशों को समझाया गया. चर्च के फादरों ने लोगों को आत्मिक शांति और भाईचारे का संदेश दिया. शहर के प्रमुख गिरिजाघर में आयोजित मुख्य प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. इस दौरान जिदातो मैथोडिस्ट चर्च के फादर इमानुएल चित्रकार ने कहा कि ईस्टर का पर्व प्रभु यीशु के पुनरुत्थान का प्रतीक है. यह दिन हमें सिखाता है कि अंधकार के बाद प्रकाश जरूर आता है, और दुख के बाद सुख. प्रभु यीशु ने अपने बलिदान से मानवता को नया जीवन दिया. यह पर्व प्रेम, करुणा, क्षमा और विश्वास का संदेश लेकर आता है. उन्होंने आगे कहा कि हम सभी को अपने जीवन में अच्छाई की राह पर चलने और दूसरों की सेवा करने का संकल्प लेना चाहिए. ईस्टर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति का अवसर भी है. फादर ने समुदाय से शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की और सभी के सुख-शांति की प्रार्थना की.

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