नगर प्रतिनिधि, पाकुड़.पाकुड़ नगर परिषद में सड़क मद से करीब दो करोड़ रुपये की राशि से 11 वार्डों के लिए चयनित योजनाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. आठ वार्ड पार्षदों ने संयुक्त रूप से नगर परिषद अध्यक्ष और कार्यपालक पदाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर संबंधित ई-टेंडर एवं निविदा की अग्रतर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.
ज्ञापन सौंपने वालों में वार्ड संख्या 4 की रुपाली सरकार, वार्ड संख्या 3 के किरण लाल कापरी, वार्ड संख्या 13 के असलम अंसारी, वार्ड संख्या 12 के भीम सिंह, वार्ड संख्या 1 के मिथुन मरांडी, वार्ड संख्या 2 के उज्ज्वल हांडी, वार्ड संख्या 17 के आलमगीर आलम तथा वार्ड संख्या 15 के चंचल सिंह शामिल हैं.
21 वार्डों की योजनाओं पर चर्चा नहीं होने का आरोप
पार्षदों का आरोप है कि 28 अप्रैल को हुई बोर्ड बैठक में सड़क मद से संबंधित योजनाओं को लेकर सभी 21 वार्डों के लिए विधिवत चर्चा और निर्णय नहीं लिया गया. इसके बावजूद बाद में केवल 11 वार्डों की योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
ज्ञापन में सात मई को हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठक तथा 18 मई को 11 वार्डों की योजनाओं को स्वीकृति दिए जाने का उल्लेख किया गया है. पार्षदों के अनुसार, दो जुलाई की बोर्ड बैठक में शेष 10 वार्डों की योजनाएं रखने की बात कही गई थी, लेकिन इस संबंध में प्रस्ताव पारित नहीं हो सका.
योजना चयन की प्रक्रिया की जांच की मांग
आठों पार्षदों ने झारखंड गजट में निर्धारित प्रावधानों के तहत योजना चयन की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित योजनाओं में इकरारनामा और कार्यादेश जारी नहीं किया जाना चाहिए.
पार्षदों ने ज्ञापन में कहा है कि यदि योजना चयन या निविदा प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित निविदा को निरस्त किया जाए. इसके बाद नगर परिषद के सभी 21 वार्डों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर नए सिरे से योजनाओं का चयन कर निविदा प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की गई है.
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जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर जोर
पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद की योजनाओं में सभी वार्डों की आवश्यकताओं को समान रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए. उनका आग्रह है कि योजना चयन और निविदा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए, ताकि विकास योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे.
