कहां थमा बाल विवाह, कहां बढ़ा? गोड्डा में गिरावट, तो पाकुड़ ने चौंकाया; जानें संताल के 6 जिलों का हाल

बाल विवाह पर NFHS-6 रिपोर्ट: पाकुड़, साहिबगंज में बढ़ी दरें, गोड्डा में 13.3% की बड़ी गिरावट.जानें 6 जिलों का चौंकाने वाला सच.

पाकुड़. बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता अभियान और सरकारी स्तर पर लगातार किए जा रहे प्रयासों के बीच संताल परगना के छह जिलों में स्थिति एक जैसी नहीं है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के पांचवें और छठे चरण के आंकड़ों की तुलना करने पर चार जिलों में 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली महिलाओं के अनुपात में कमी दर्ज की गई है, जबकि पाकुड़ और साहिबगंज में यह आंकड़ा बढ़ा है. छह जिलों में सबसे अधिक 2.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी पाकुड़ में दर्ज की गई है.

एनएफएचएस के इस संकेतक में 20-24 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का अनुपात देखा जाता है, जिनका विवाह 18 वर्ष की उम्र से पहले हुआ था. वर्ष 2019-21 की तुलना में 2023-24 के आंकड़ों में गोड्डा में सबसे बड़ा सुधार हुआ है. वहीं देवघर में इस अवधि के दौरान मामूली गिरावट दर्ज की गई है.

पाकुड़ और साहिबगंज में बढ़ा बाल विवाह का अनुपात

पाकुड़ में 2019-21 के दौरान 20-24 वर्ष आयु वर्ग की 43.4 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था. 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गया. यानी इस अवधि में 2.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई.

साहिबगंज में भी स्थिति में सुधार के बजाय मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यहां यह आंकड़ा 39.9 प्रतिशत से बढ़कर 40.6 प्रतिशत हो गया. यानी 0.7 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई.

गोड्डा में सबसे बड़ा सुधार, 13.3 अंक की गिरावट

छह जिलों में सबसे बड़ा सुधार गोड्डा में दर्ज किया गया है. यहां 2019-21 में 48.5 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हुआ था. 2023-24 में यह आंकड़ा घटकर 35.2 प्रतिशत रह गया. यानी 13.3 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई.

दुमका में भी उल्लेखनीय गिरावट आयी है. यहां यह आंकड़ा 43.1 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया. वहीं जामताड़ा में 50.5 प्रतिशत से घटकर 44.2 प्रतिशत और देवघर में 49.2 प्रतिशत से घटकर 48.1 प्रतिशत हो गया.

जामताड़ा में पहले सबसे अधिक था आंकड़ा, अब देवघर आगे

2019-21 में संताल परगना के छह जिलों में बाल विवाह का यह अनुपात सबसे अधिक जामताड़ा में 50.5 प्रतिशत था. इसके बाद देवघर 49.2 प्रतिशत और गोड्डा 48.5 प्रतिशत पर था.

2023-24 में तस्वीर बदली है. अब छह जिलों में सबसे अधिक आंकड़ा देवघर में 48.1 प्रतिशत है. इसके बाद पाकुड़ 45.9 प्रतिशत और जामताड़ा 44.2 प्रतिशत पर है. वहीं सबसे कम आंकड़ा गोड्डा में 35.2 प्रतिशत और दुमका में 36 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

छह जिलों में बाल विवाह के आंकड़ों में कितना बदलाव

जिला2019-212023-24बदलाव
देवघर49.2%48.1%1.1 अंक कमी
दुमका43.1%36.0%7.1 अंक कमी
गोड्डा48.5%35.2%13.3 अंक कमी
जामताड़ा50.5%44.2%6.3 अंक कमी
पाकुड़43.4%45.9%2.5 अंक बढ़ोतरी
साहिबगंज39.9%40.6%0.7 अंक बढ़ोतरी

चार जिलों में कमी, पाकुड़ और साहिबगंज में बढ़ोतरी क्यों?

संताल परगना के आंकड़े यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि जब चार जिलों में बाल विवाह के इस संकेतक में कमी आयी है, तो पाकुड़ और साहिबगंज में इसमें बढ़ोतरी क्यों हुई. खासकर पाकुड़ में यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आयी है, जब बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन, बाल संरक्षण इकाई, आंगनबाड़ी, स्कूलों और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.

बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल जागरूकता अभियान ही पर्याप्त हैं या किशोरियों की शिक्षा, स्कूल छोड़ने की स्थिति, आर्थिक परिस्थितियां और सामाजिक दबाव जैसे कारण भी इसके पीछे हैं. इन पहलुओं की पड़ताल जरूरी है.

एनएफएचएस का आंकड़ा सीधे तौर पर यह नहीं बताता कि किन कारणों से बाल विवाह हुआ. इसलिए पाकुड़ के प्रखंडवार आंकड़ों, बाल विवाह रोकने के लिए की गई प्रशासनिक कार्रवाई, दर्ज मामलों और स्कूल छोड़ने वाली किशोरियों के आंकड़ों को इसके साथ जोड़कर स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सकती है.

नोट : यह रिपोर्ट एनएफएचएस-6 से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है.


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लेखक के बारे में

By सानू दत्ता

सानू दत्ता: पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। वर्तमान में प्रभात खबर, पाकुड़ में कार्यरत हूं। ग्रामीण विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखता हूं। डिजिटल पत्रकारिता और मल्टीमीडिया कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं।

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