पाकुड़ : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने पाकुड़ मुफस्सिल थाना कांड संख्या 94/2026 के आरोपी अजहर इस्लाम और अली अकबर को अग्रिम जमानत दे दी है. दोनों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर 14 अगस्त को सुनवाई हुई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए अग्रिम जमानत प्रदान कर दी. मामले में इससे पहले 12 अगस्त को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे.
दो अलग FIR पर अदालत सख्त, पुलिस की तकनीकी गलती की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि एक ही कांड संख्या, तिथि और समय से संबंधित रिकॉर्ड में दो अलग-अलग एफआईआर मौजूद थीं. बाद में अपलोड की गई एफआईआर में बीएनएस की धारा 109(1) के साथ एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराएं जोड़ी गई थीं. इस संबंध में एसडीपीओ और थाना प्रभारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया. अधिकारियों ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के बजाय ऑपरेटर की तकनीकी एवं प्रशासनिक अज्ञानता के कारण हुई त्रुटि बताया. हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
एफआईआर में बदलाव को कोर्ट ने माना गंभीर अनियमितता, 8 सितंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे महज तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ और गंभीर अनियमितता का मामला माना. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए एफआईआर में हुए बदलाव की बीएनएसएस की धारा 379 के तहत जांच का आदेश दिया है. इसके लिए अलग से विविध रिकॉर्ड खोला गया है. मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है. इसी बीच 14 अगस्त को हुई सुनवाई में अदालत ने अजहर इस्लाम और अली अकबर की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली.
