कुड़ू. नववर्ष 2026 का आगमन हो चुका है, लेकिन कुड़ू प्रखंड की जनता के सपने अब भी अधूरे हैं. आबादी एक लाख से अधिक हो चुकी है, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों को परेशान कर रहा है.
स्वास्थ्य सेवा : पिछले 18 वर्षों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है. चार करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भवन अधूरा है और जो बना वह खंडहर में तब्दील हो चुका है. मरीजों को मामूली बीमारी से लेकर सड़क हादसे तक में लोहरदगा और रांची रेफर करना पड़ता है.
जलापूर्ति योजना : लगभग आठ करोड़ की लागत से ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूरी की गई थी. टाटी और पंडरा पंचायतों के 2100 घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना लक्ष्य था, लेकिन आज भी शहरी क्षेत्र के लोग ठंड में पानी के लिए भटक रहे हैं. गर्मी में हालात और बिगड़ने की आशंका है.
सड़क व्यवस्था : सलगी, बड़की चांपी और सुंदरू को जोड़ने वाली सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. बंदुवा मोड़ से सलगी और चीरी तक, जीमा गोपीटोला से जीमा चौक तक सड़कें इतनी खराब हैं कि रोजाना बाइक सवार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं.शिक्षा : कुड़ू में कॉलेज का अभाव है. हर साल तीन हजार विद्यार्थी मैट्रिक पास करते हैं, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है. 26 साल से कॉलेज की मांग की जा रही है, पर कार्रवाई नहीं हुई.
खेल सुविधाएं : दो मिनी स्टेडियम बने हैं, लेकिन खेल सामग्री और प्रशिक्षक की कमी से प्रतिभाएं दब रही हैं. 14 पंचायतों में बनी करोड़ों की लागत की जलमीनारें मेंटनेंस के अभाव में शोपीस बन गयी हैं.प्रभारी बीडीओ सह सीओ संतोष उरांव ने कहा है कि सभी मामलों से उपायुक्त को अवगत कराया जायेगा.
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