ट्रेन बंद हुई तो उजड़ गया रोजगार, चेन्नई चला गया रंजीत

ट्रेन बंद हुई तो उजड़ गया रोजगार, चेन्नई चला गया रंजीत

लोहरदगा. रेल सेवा बंद होने का दंश सिर्फ यात्रियों ने ही नहीं, बल्कि स्टेशन पर निर्भर छोटे दुकानदारों ने भी झेला है. इसका जीवंत उदाहरण है स्टेशन के बाहर होटल चलाने वाले रंजीत की कहानी है, जिसे आर्थिक तंगी के कारण रोजी-रोटी की तलाश में चेन्नई पलायन करना पड़ा. रंजीत वर्षों से अपने छोटे से होटल के जरिये परिवार का भरण-पोषण कर रहा था. ट्रेन से आने-जाने वाले यात्री और रेलवे कर्मचारी ही उसकी आय के मुख्य स्रोत थे. चार जनवरी को कोयल नदी पुल में खराबी के बाद जैसे ही ट्रेनों का परिचालन थमा, स्टेशन पर सन्नाटा पसर गया. ग्राहकों के अभाव में रंजीत का होटल बंद होने की कगार पर पहुंच गया और घर में दाने-दाने के लाले पड़ गये. मजबूर होकर रंजीत को अपनी जड़ें छोड़कर सुदूर चेन्नई जाना पड़ा. स्थानीय लोगों के अनुसार, रंजीत जैसे कई मजदूर और दुकानदार थे जिनकी आजीविका पूरी तरह पटरी पर निर्भर थी. अब तीन महीने बाद रेल सेवा बहाल होने से क्षेत्र में नयी उम्मीद जागी है. रंजीत की पत्नी ने बताया कि उन्होंने पति को ट्रेन शुरू होने की खबर दे दी है. अब वे जल्द लौटेंगे और एक बार फिर पूरा परिवार साथ रहकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेगा.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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