लोहरदगा में आदिवासी मॉडल अखड़ा का उद्घाटन, 41 खोड़हा को मिले मांदर, संस्कृति संरक्षण पर जोर

लोहरदगा में आदिवासी मॉडल अखड़ा का उद्घाटन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक नृत्य-संगीत को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना है. इस दौरान 41 खोड़हा को मांदर प्रदान किए गए, जो पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

लोहरदगा. शहरी क्षेत्र के कचहरी मोड़ के समीप दरहा देशवाली स्थल में बुधवार को आदिवासी मॉडल अखड़ा का उद्घाटन हुआ. लोहरदगा विधायक डॉ रामेश्वर उरांव और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने संयुक्त रूप से फीता काटकर एवं विधिवत पूजा-अर्चना कर अखड़ा को समाज को समर्पित किया. कार्यक्रम का आयोजन रूढ़िजन्य जनजाति पड़हा सरना प्रार्थना सभा जिला समिति लोहरदगा के तत्वावधान में किया गया.

उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य-संगीत के बीच कार्यक्रम हुआ. इस दौरान जिले के 41 खोड़हा को मांदर प्रदान किया गया. आयोजकों ने बताया कि मॉडल अखड़ा का उद्देश्य पारंपरिक नृत्य-संगीत को बढ़ावा देने के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना है.

अखड़ा सामाजिक संवाद का भी केंद्र : धीरज साहू

पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपरा, नृत्य-संगीत और सामाजिक व्यवस्था से है. अखड़ा केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र भी है. आधुनिक समय में अपनी जड़ों और परंपराओं को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि मॉडल अखड़ा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा.

युवाओं को संस्कृति से जोड़ना जरूरी : डॉ रामेश्वर उरांव

विधायक डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं सदियों पुरानी हैं और अखड़ा सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है. मॉडल अखड़ा बनने से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा. उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं से जोड़ना समय की जरूरत है.

आयोजकों ने कहा कि शहर के बीचोंबीच मॉडल अखड़ा बनने से समाज के पारंपरिक आयोजनों को व्यवस्थित स्थान मिलेगा. साथ ही युवाओं और बच्चों को पारंपरिक नृत्य-संगीत से जोड़ने में भी यह उपयोगी साबित होगा. 41 खोड़हा को मांदर दिया जाना पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल है.

मौके पर उपायुक्त संदीप कुमार मीना, एसपी सादिक अनवर रिजवी, डीडीसी राजमहेश्वरम, रोहित उरांव, विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल, एसडीपीओ श्रद्धा केरकेट्टा, डीएसपी समीर तिर्की, अधिवक्ता सच्चिदानंद चौधरी, जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उरांव, विशाल डुंगडुंग, निश्चय वर्मा, अमित वर्मा, संदीप साहू, सुधु उरांव, जलेश्वर उरांव, बिरसा उरांव, असलम अंसारी, सोमदेव उरांव, देवंती उरांव, सोमती उरांव, सुनीता उरांव, विजय उरांव, नारायण उरांव, शशिकांत उरांव, मनीष कुजूर सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग और समिति के सदस्य उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

By गोपी कृष्ण

गोपी कृष्ण वर्तमान में ब्यूरो प्रमुख हैं. समाज में व्याप्त समस्याओं, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, महिला उत्पीड़न, पलायन को लेकर काम में रूचि है. बहुत काम किया है.

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