पीपीवी एवं एफआर अधिनियम 2001 पर प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम

भारतीय पौधा किस्म और कृषक प्राधिकरण, नयी दिल्ली तथा कृषि विज्ञान केंद्र, लोहरदगा द्वारा पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया.

लोहरदगा जिला जैव विविधता के मामले में समृद्ध है फोटो किसानों को जानकारी देते रजिस्टार किस्को लोहरदगा. भारतीय पौधा किस्म और कृषक प्राधिकरण, नयी दिल्ली तथा कृषि विज्ञान केंद्र, लोहरदगा द्वारा पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 49 किसान और 10 विभागीय पदाधिकारी शामिल हुए। किसानों ने देशज किस्मों के विभिन्न उत्पादित बीजों का पंजीकरण कराया। कार्यक्रम में पीपीवीएफआर राँची के रजिस्ट्रार डॉ हरिश्चन्द्र सिंह और केवीके की प्रधान वैज्ञानिक डॉ किरण सिंह उपस्थित रहे। डॉ किरण सिंह ने किसानों द्वारा लाये गये देशज बीजों की सराहना करते हुए कहा कि लोहरदगा जिला जैव विविधता के मामले में समृद्ध है और इसे पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने लाल चावल जैसी देशज किस्मों की प्रशंसा की और ग्रामीण महिलाओं के योगदान को विशेष महत्व दिया। उन्होंने विभागों को इस दिशा में पहल करने का निर्देश दिया। डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह ने कृषक अधिकार अधिनियम 2001 की तकनीकी व्याख्या सरल शब्दों में किसानों को समझायी. उन्होंने बताया कि प्राधिकरण किसानों के साथ हर समय खड़ा है, जो उनके देशज किस्मों को पहचान दिलाने के साथ-साथ पारितोषिक भी दिलवाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक पंजीकृत फसलों और किस्मों में झारखंड का योगदान सबसे अधिक है। कार्यक्रम में किसानों को जड़ी-बूटियों, घास-फूस और पेड़-पौधों के महत्व व उनके औषधीय लाभों की जानकारी दी गयी। यह पहल न केवल किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करती है, बल्कि देशज किस्मों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों तक उनके लाभ पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है.

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By VIKASH NATH

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