लोहरदगा़ राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लोहरदगा जिले में 10 से 26 नवंबर तक कुष्ठ रोग खोज अभियान चलाया जायेगा. इसके तहत सहिया, सुपरवाइजर और वॉलंटियर की टीमें घर-घर जाकर संभावित कुष्ठ रोगियों की पहचान करेंगी. उपायुक्त डॉ ताराचंद ने अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों (मुखिया, वार्ड सदस्य आदि) और ग्रामीणों के सहयोग की अपील की है. उन्होंने पारंपरिक तरीके से प्रचार-प्रसार करने, सर्वे टीम को प्रशिक्षण पूर्ण कर अभियान के लिए तैयार रखने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया. समाज कल्याण, शिक्षा और पंचायती राज विभाग को भी अभियान की सफलता के लिए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने को कहा गया. प्रवास करने वाले परिवारों के कारण अभियान संचालन में आने वाली चुनौतियों और उनके निवारण पर भी चर्चा की गयी. उपायुक्त ने कहा कि कुष्ठ रोग की पहचान समय पर नहीं होने से गंभीर नुकसान हो सकता है. यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसके लक्षण 2-3 वर्षों तक स्पष्ट नहीं होते. यदि शरीर के किसी हिस्से पर दाग है और वह हिस्सा सुन्न महसूस होता है, तो यह कुष्ठ का संकेत हो सकता है. ऐसे में व्यक्ति को सर्वे टीम से जांच अवश्य करानी चाहिए. टीम में पुरुष और महिला सदस्य दोनों रहेंगे, जो गोपनीयता का पूरा ध्यान रखेंगे. कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है, जो त्वचा, तंत्रिकाओं, आंखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. उपायुक्त ने कहा कि पहचान होने पर रोगियों का नि:शुल्क इलाज किया जायेगा और उनके ठीक होने तक मॉनिटरिंग की जायेगी. उन्होंने पंचायतवार सर्वे टीम गठित कर उन्हें संबंधित पंचायतों से टैग करने का निर्देश दिया. बैठक में जिला परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष विनोद उरांव, अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, परियोजना निदेशक सुषमा नीलम सोरेंग, सिविल सर्जन डॉ राजू कच्छप, डीएफआइटी कोऑर्डिनेटर डॉ गौतम कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद थी.
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