लोहरदगा़ जिले में बढ़ती गर्मी और तीखी धूप ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है. शनिवार को लोहरदगा का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, विगत कई वर्षों में इस तरह की भीषण गर्मी नहीं पड़ी थी. पहले दो दिन तीखी धूप के बाद तीसरे दिन बारिश हो जाती थी, लेकिन अब दूषित पर्यावरण और विकास की दौड़ में अंधाधुंध कटते पेड़ों के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है. सूख रहे जल स्रोत, जरूरी काम होने पर ही निकल रहे लोग : बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों के कारण दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है. लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. अनियमित बारिश के चलते जेठ के महीने में ही नदी-नाले और पारंपरिक जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे भूगर्भीय जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है. इसका खामियाजा इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी भुगतना पड़ रहा है. किसानों पर दोहरी मार : इस भीषण तपिश से सबसे ज्यादा परेशान किसान हैं, विशेषकर वे जिन्होंने हरी सब्जियों की खेती की है. किसानों का कहना है कि तेज धूप के कारण फसलों को रोजाना पानी देना पड़ रहा है. यदि एक दिन भी पटवन न हो, तो खेतों में दरारें पड़ जाती हैं और फसलें सूखने लगती हैं. रोज-रोज पटवन करने से किसानों की लागत बढ़ गयी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से जनजीवन बेहाल, पारा 39 डिग्री पहुंचा
जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से जनजीवन बेहाल, पारा 39 डिग्री पहुंचा
