लोहरदगा. आस्था और श्रद्धा के महापर्व छठ के तीसरे दिन मंगलवार को जिले भर में भक्तिमय माहौल रहा. व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना की. शाम होते ही शहर के विभिन्न तालाबों और नदी घाटों पर पारंपरिक परिधानों में सूप और दौरा लेकर व्रतियों का रेला उमड़ पड़ा. कांच ही बांस के बहंगिया जैसे छठी मैया के गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा. प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे. घाटों पर साफ-सफाई के साथ-साथ रोशनी की समुचित व्यवस्था रही और जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा. काफी संख्या में उमड़ी भीड़ के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से संध्या अर्घ संपन्न हुआ. अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना के बाद अब बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ दिया जायेगा. इसके साथ ही व्रती अपना 36 घंटे का निर्जला उपवास पारण कर पूरा करेंगी.छठ को लेकर जिले में हर तरफ उत्साह का वातावरण देखा जा रहा है. कोयल और बांकी नदी तट पर व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ सेन्हा. प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को चैती छठ पर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान भुवन भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ अर्घ अर्पित किया. चितरी कोयल नदी और बांकी नदी सहित विभिन्न तालाबों व जलाशयों के तट पर व्रतियों ने सूप और दौरा सजाकर छठी मैया की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य की मंगल कामना की. शास्त्रों के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष का यह महापर्व ””””डाला छठ”””” के नाम से भी विख्यात है और इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है. रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुए इस चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन व्रतियों ने विभिन्न पूजन सामग्रियों से भगवान सूर्य की पूजा की. संध्या काल में सूर्य दर्शन के पश्चात अर्घ दिया. अब बुधवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ देने के साथ ही इस महापर्व का विधिवत समापन होगा.
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देकर व्रतियों ने सुख-समृद्धि मांगी
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देकर व्रतियों ने सुख-समृद्धि मांगी
