गोपी कृष्णा कुंवर की रिपोर्ट
लोहरदगाः जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर शंख-लुकैया पथ इन दिनों राहगीरों के लिए परेशानी के साथ-साथ हादसे का बड़ा खतरा बन गया है. बिरसा चौक स्थित शंख नदी से करीब 50 मीटर की दूरी पर रेलवे ब्रिज के नीचे सड़क की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे और उबड़-खाबड़ सड़क राहगीरों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं. बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खतरनाक हो जाती है. ऐसे में इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरना लोगों के लिए किसी जोखिम से कम नहीं है.
भारी वाहनों का दबाव, सड़क की हालत बदहाल
शंख-लुकैया पथ लोहरदगा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है. इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है. खासकर हिंडाल्को के हेसल साइडिंग से आने-जाने वाले सैकड़ों ट्रकों के कारण इस सड़क पर भारी वाहनों का दबाव बना रहता है. लगातार भारी वाहनों के परिचालन के बावजूद सड़क की नियमित मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.
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कई महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है यह मार्ग
स्थानीय लोगों के अनुसार, शंख-लुकैया पथ आगे टोरी और लातेहार होते हुए सासाराम, डोभी, गया और पटना समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है. इसी मार्ग से कुजरा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और हेसल स्थित महत्वपूर्ण अस्पताल तक भी लोग पहुंचते हैं. सड़क की बदहाली का असर विद्यार्थियों, मरीजों, उनके परिजनों, वाहन चालकों और आम राहगीरों पर सीधे पड़ रहा है.
बारिश में गड्ढे बन जाते हैं जानलेवा
रेलवे ब्रिज के नीचे सड़क पर बने गड्ढों में बारिश का पानी जमा हो जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. दोपहिया वाहन चालकों के लिए यहां से गुजरना विशेष रूप से जोखिम भरा हो जाता है. चारपहिया और भारी वाहनों के चालक भी गड्ढों से बचते हुए किसी तरह आगे बढ़ते हैं. स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं करायी गयी, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
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लंबे समय से खराब है सड़क, बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद इसकी अनदेखी से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. लोगों का कहना है कि छोटे-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
बड़े हादसे या आंदोलन का इंतजार?
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं करायी गयी, तो ग्रामीण और राहगीर आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं. उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल सड़क का निरीक्षण कराने, गड्ढों को भरने और पूरे मार्ग का स्थायी रूप से जीर्णोद्धार कराने की मांग की है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे या आंदोलन का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही इस ‘मौत के कुंआ’ जैसी सड़क की सुध ली जाएगी?
