लोहरदगा. लोकसभा सांसद एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सुखदेव भगत ने UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव में काम कर रही है और नई व्यवस्था का बोझ आम लोगों, मध्यम वर्ग, किसानों और छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है.
सांसद ने कहा कि 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू करने की व्यवस्था की गई है. सरकार ने 15 सितंबर को स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा और ग्राहकों से सीधे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा.
स्कूल फीस, दवा और राशन का दिया उदाहरण
सुखदेव भगत ने कहा कि आम आदमी भी 2,000 रुपये से अधिक का UPI भुगतान करता है. बच्चों की स्कूल फीस, दवा का खर्च या घर के राशन जैसी जरूरतों के लिए डिजिटल भुगतान आम हो चुका है. ऐसे में शुल्क की व्यवस्था को लेकर उन्होंने इसे आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बताया.
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है, तब डिजिटल लेनदेन को और आसान और सस्ता बनाया जाना चाहिए. कांग्रेस इसका विरोध करती है.
'क्या यही डिजिटल इंडिया का मॉडल है?'
सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या डिजिटल इंडिया का मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिसमें नागरिकों को अपना पैसा डिजिटल माध्यम से इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त बोझ उठाना पड़े. उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था से अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है. यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों और UPI एप प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाएगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन मुफ्त रहेगा.
