धान कटाई में मशीनें बनीं किसानों की पहली पसंद, मजदूरी दर में भी बढ़ोतरी

धान कटाई में मशीनें बनीं किसानों की पहली पसंद, मजदूरी दर में भी बढ़ोतरी

कैरो़ मोंथा चक्रवात के बाद मौसम साफ होते ही कैरो प्रखंड क्षेत्र के किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है. खेतों में एक बार फिर रौनक लौट आयी है. इस बार किसानों ने परंपरागत तरीके के बजाय आधुनिक मशीनों से धान की कटाई और मिसाई शुरू की है. अब किसानों को मजदूरों पर पहले जैसी निर्भरता नहीं रह गयी है. खेतों में पूरी तरह पके धान की तेजी से कटाई की जा रही है. कई जगहों पर मजदूरों और मशीनों दोनों से कार्य चल रहा है. धान की कटाई के साथ ही किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में भी जुट गये हैं. अधिकांश किसान खेतों में ही थ्रेसर मशीन से धान की मिसाई कर रहे हैं और वहीं से सीधे धान की बिक्री भी कर दे रहे हैं. पहले जहां खलिहानों में धान के बड़े-बड़े गांज देखने को मिलते थे, अब खेतों से ही मिसाई कर ली जाती है, जिससे खलिहानों की रौनक गायब हो गयी है. आधुनिक उपकरणों के उपयोग से खेती में काफी सुविधा : किसानों का कहना है कि आधुनिक उपकरणों के उपयोग से खेती में काफी सुविधा हुई है. पहले धान की कटाई और मिसाई में एक माह से अधिक समय लगता था़ वहीं, अब कुछ ही दिनों में पूरा काम खत्म हो जाता है. मजदूरों की भी कमी महसूस नहीं होती. इस वर्ष महिला मजदूर धान कटाई के लिए 250 से 300 रुपये प्रतिदिन ले रहीं हैं, जबकि मशीन से धान की कटाई 800 से 900 रुपये प्रति घंटा और मिसाई 1200 रुपये प्रति घंटा की दर से की जा रही है. एक घंटे में मशीन से एक एकड़ धान की कटाई और लगभग 50 से 60 बोरा धान की मिसाई हो जाती है. किसानों का कहना है कि बढ़ती मजदूरी और मजदूरों की कमी के बीच आधुनिक मशीनें खेती के लिए वरदान साबित हो रहीं हैं.

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