लोहरदगा. नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. कथा व्यास अयोध्या से पधारे अच्युत प्रपन्नाचार्य महाराज ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक प्रसंग पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि रुक्मिणी समर्पण का प्रतीक हैं और भगवान श्री कृष्ण परमेश्वर हैं. जीव का ईश्वर से मिलन ही वास्तव में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह है.
विवाह उत्सव में झूमे श्रद्धालु
जैसे ही भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की रस्म शुरू हुई, पूरा पंडाल 'जय श्री कृष्ण' के जयकारों से गूंज उठा. कृष्ण-रुक्मिणी की अलौकिक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. मंगल गीतों और भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए. महिलाओं ने भी विवाह उत्सव को धूमधाम से मनाया.
कथा के प्रारंभ में सुनील अग्रवाल, राकेश कुमार सिन्हा, जय प्रकाश शर्मा, मनीष राजगढ़िया ने सपत्नीक तथा राजन मेहता ने अपनी माता के साथ आरती में शामिल होकर व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया. शहर के गणमान्य लोगों ने भगवान के स्वरूपों की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया.
छप्पन भोग और प्रसाद का हुआ वितरण
कार्यक्रम में मदन मोहन पांडे, शिव प्रसाद राजगढ़िया और लखन साहू समेत अन्य लोगों ने धार्मिक आयोजन की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सनातन संस्कृति का संचार करते हैं. कथा के दौरान सजीव झांकी के माध्यम से भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की रस्मों को जीवंत रूप दिया गया.
विवाह संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच छप्पन भोग और प्रसाद का वितरण किया गया. आयोजन समिति के सदस्य जय गोविंद, अशोक कांस्यकर, प्रमोद अग्रवाल, नरेंद्र मित्तल, मनीष राजगढ़िया, मुरली अग्रवाल, सुनील मेहता, संजय शर्मा, संजय अग्रवाल, कंचन कांस्यकर, निशु चौधरी, संजय चौधरी और आनंद पांडे समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
आयोजन समिति के सदस्य जय प्रकाश शर्मा ने बताया कि कथा के समापन पर यज्ञ और हवन के बाद पूर्णाहुति की जाएगी.
