विकास की बाट जोह रही है कोचा के पहाड़ों के तलहटी में बसा गांव

किस्को के खरकी पंचायत क्षेत्र के कोचा गांव के पहाड़ों के तलहटी में बसे ऊपर कोचा, बरनाग,करम टोली एवं बाँध टोली में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

चार किमी की दूरी पर रहनेवाली मुखिया नहीं आती है गांव

किस्को. किस्को के खरकी पंचायत क्षेत्र के कोचा गांव के पहाड़ों के तलहटी में बसे ऊपर कोचा, बरनाग,करम टोली एवं बाँध टोली में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें क्षेत्र के लोगों ने अपनी समस्या बेबाक तरीके से प्रभात खबर के समक्ष रखा. इन गांवों में मुंडा,नगेसिया,उरांव,लोहार,तुरी,समुदाय के अलावा अन्य जातियों के लोग निवास करते हैं. जो आज भी विकास के बाट जोह रहे हैं. किस्को प्रखंड मुख्यालय से मात्र 06 किलोमीटर दूर खरकी पंचायत क्षेत्र के पहाड़ों के इर्द गिर्द बसे गांव विकास से कोसों दूर है. गांव में न तो पेयजल सुविधा है, न ही सड़क की व्यवस्था, रोजगार की अभाव गांव के अधिकांश लोग पलायन कर जाते हैं.जिस कारण गांव में बहुत कम लोग नजर आते हैं. सरकारी योजनाओं के लाभ देने में भी गांव के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है.

गांव के अधिकांश लोगों का जीविकोपार्जन का मुख्य साधन जंगल के सूखे पेड़ों की लकड़ी को बेचकर चलता है.गांव में पहुंचने के लिए ना तो सड़क है.ना ही पेयजल की समुचित व्यवस्था.उबड़ खाबड़ सड़क पर लोग चलने को विवश हैं. कई जगह पुल टूटे हुए हैं. बरसात में आवागमन पूरी तरह बाधित रहती है. परंतु प्रशासन व जनप्रतिनिधी मामले को लेकर गंभीर नहीं है. प्रभात खबर द्वारा खबर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्या पहुंचाने की प्रयास किया जा रहा है. ग्रामीण सोहबइत मुंडा,संगीता मुंडा एवं मुक्ति लकड़ा ने कहा कि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या होती है.अब तक यहां के जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट के समक्ष गांव आते हैं.हम गांव वाले एकजुट होकर भरोसा जताकर वोट देते हैं,लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि ना तो गांव आते हैं और ना ही हम लोगों को सुध लेते हैं. लेकिन करे भी तो क्या मतदान किसी न किसी को करना ही है. इस गांव में चुनाव को समय सभी दल के लोग पहुंचते हैं. लेकिन हम लोग एकजुट होकर सबसे ज्यादा भरोसा दिलाने वाले पार्टी को ही वोट देते हैं.

प्रशासन के अधिकारी भी गांव का विकास में कोई रुचि नहीं लेते हैं. गांव में अब तक प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी नहीं पहुंचे हैं.इससे स्पष्ट है कि इस गांव के विकास से किसी को कोई मतलब नहीं है. पंचायती राज के बाद मुखिया का चुनाव हुआ तीन बार हम लोगों ने मुखिया को वोट दिए. लेकिन मात्र चार किलोमीटर की दूरी के पर स्थित इस गांव में मुखिया भी दोबारा नहीं आयी. ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंच पथ काफी जर्जर है. गांव में ना तो पीने की शुद्ध पानी उपलब्ध हो पाती है.और ना ही स्वास्थ्य सुविधा है. छोटी-मोटी बीमारियों में भी हम लोगों को किस्को जाना पड़ता है. ग्रामीण जगदेव लोहरा, सोमा नगेसिया, कुँवर तुरी का कहना है कि पेयजल संकट के कारण लोग नदी का गंदा पानी पीने को विवश हैं.नदी में बाक्साइट माइंस को लेकर लाल पानी बहती है.वही लोग आज भी नदी पार कर अपने गांव पहुंचते हैं.नदी में पुल का निर्माण नहीं कराया गया है.अन्य मौसम में तो लोग नदी पार कर अपने गांव पहुंच जाते हैं लेकिन बरसात के मौसम में नदी में पानी भर जाने के बाद सप्ताह भर गांव में रहने की व्यवस्था करनी पड़ती हैं.चुकी पहाड़ी नदी के पानी का तीव्र अधिक होता है.कोई भी व्यक्ति जान जोखिम में डालकर नदी पार करने का साहस नहीं करता.हालांकि इस अवधि में खाने पीने का संकट पैदा हो जाता है.कई बार तो अगल-बगल से लेकर लोगों को काम चलाना पड़ता है.बाँध टोली से करम टोली को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जर्जर अवस्था में है जगह-जगह सड़क कटाव होने से सड़क संकीर्ण हो गया है.जो खतरे को आमंत्रित कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन गांव की विकास में ध्यान दे.जिससे ग्रामीणों को सरकारी सुविधा उपलब्ध हो सके.

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By Prabhat Khabar News Desk

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