कुड़ू़ प्रखंड के ककरगढ़ पंचायत के फुलसुरी कोठीटोला में रविवार को सात घंटे तक धर्म परिवर्तन को लेकर हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा. एक बच्ची की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव को आदिवासी मसना (श्मशान) में दफनाने से रोक दिया. बाद में प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझ सका और देर शाम करीब सात बजे शव को दफनाया गया. जानकारी के अनुसार, स्व. बिगन उरांव की पत्नी जसमीना उरांव ने कुछ वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपना लिया था और चर्च जाने लगी थीं. दो दिन पहले उनकी पुत्री अनुप्रिया की इलाज के दौरान रांची के एक निजी अस्पताल में मौत हो गयी. रविवार दोपहर करीब एक बजे जब शव गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने विरोध जताया और कहा कि जब परिवार ने आदिवासी सरना धर्म छोड़ दिया है, तो शव को आदिवासी मसना में दफनाने की अनुमति नहीं दी जायेगी. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि जसमीना उरांव लिखित रूप में आवेदन देकर बताये कि वह सरना धर्म में वापस आ रही हैं और बच्ची का क्रियाकर्म आदिवासी परंपरा के अनुसार होगा. सात घंटे तक चली नोकझोंक और समझाने के बाद आखिरकार जसमीना उरांव ने लिखित सहमति दी. इसके बाद देर शाम करीब सात बजे बच्ची का दफन कार्य शुरू किया गया. पूरे घटनाक्रम को शांतिपूर्वक सुलझाने में कुड़ू थाना के सहायक अवर निरीक्षक मनोज कुमार, ककरगढ़ पंचायत की मुखिया चेमनी टोप्पो, समाजसेवी रोजामत अंसारी सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
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