वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर बेहतर पैदावार करे किसान : डॉ किरण सिंह

किस्को में धान की कटाई के बाद किसानों ने तेजी से गेहूं और सरसों की बुआई शुरू कर दी है.

फोटो. लहलहाती सरसो की फसल. किस्को. किस्को में धान की कटाई के बाद किसानों ने तेजी से गेहूं और सरसों की बुआई शुरू कर दी है. अधिकांश किसानों ने गेहूं की बुआई पूरी कर ली है और सिंचाई की तैयारी में जुटे हैं. साथ ही कई किसान कद्दू, मटर, प्याज जैसी सब्जियों की भी बुआई कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र की प्रधान वैज्ञानिक डॉ किरण सिंह ने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल 21–25 दिन की हो चुकी है, ऐसे में किसान पहली सिंचाई कर सकते हैं. सरसों की फसल में औसत तापमान कम होने से सफेद रतुआ रोग की संभावना रहती है, इसलिए नियमित निगरानी आवश्यक है. प्याज की रोपाई से पहले अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और पोटाश उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए. आलू और टमाटर में हवा में अधिक नमी के कारण झुलसा रोग की आशंका है, लक्षण दिखने पर डाईथेन-एम-45 का छिड़काव करना चाहिए. गोभी वर्गीय सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों की संख्या बढ़ने पर बीटी या स्पेनोसेड का छिड़काव करना लाभकारी होगा. सब्जियों की निराई-गुड़ाई कर खरपतवार नष्ट करें और सिंचाई के बाद उर्वरकों का भुरकाव करें. इस मौसम में मिलीबग के बच्चे आम के तनों पर चढ़ते हैं, इसे रोकने के लिए जमीन से 0.5 मीटर ऊंचाई पर तने के चारों ओर 25–30 सेमी चौड़ी अल्काथीन पट्टी लपेटनी चाहिए. डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे बेहतर तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें ताकि फसलें रोगमुक्त रहें और उत्पादन अधिक हो.

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By VIKASH NATH

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