कांपते हाथों से राम दरबार के लिए अर्पित किए 11 हजार, बुजुर्ग दंपति की आस्था ने छुआ दिल

लोहरदगा के मेढो गांव निवासी बुजुर्ग दंपति ने अपनी जीवन भर की कमाई से 11 हजार रुपये श्री राम दरबार मंदिर न्यास के निर्माण के लिए दान किए हैं. उनकी अटूट आस्था और त्याग ने सभी को भावुक कर दिया है.

लोहरदगा: उम्र के उस पड़ाव पर जब इंसान अपनी जमा-पूंजी को बुढ़ापे का सहारा मानता है, सेंन्हा प्रखंड के मेढो गांव निवासी बुजुर्ग दंपति महेश्वर प्रसाद सिंह और सरस्वती देवी ने आस्था और त्याग की अनूठी मिसाल पेश की है. दंपति ने अपनी मेहनत की कमाई से बचाई गई राशि में से 11 हजार रुपए श्री राम दरबार मंदिर न्यास के निर्माण के लिए अर्पित किए.

यह सहयोग महज 11 हजार रुपए का नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट आस्था, संस्कार और समर्पण का प्रतीक है. जब बुजुर्ग दंपति मंदिर निर्माण के लिए राशि लेकर पहुंचे, तो उम्र के कारण उनके हाथ कांप रहे थे, लेकिन प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास अडिग था. उनकी इस भावना ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया.

सीमित साधनों के बावजूद मंदिर निर्माण में सहयोग

ग्रामीण परिवेश से आने वाले महेश्वर प्रसाद सिंह और सरस्वती देवी की आर्थिक स्थिति सीमित है. इसके बावजूद उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग को अपना सौभाग्य माना. उनके लिए यह सिर्फ धनराशि का दान नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम है. श्री राम दरबार मंदिर न्यास निर्माण समिति ने बुजुर्ग दंपति के योगदान के प्रति आभार जताया. समिति ने कहा कि मंदिर केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट से नहीं बनते, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था, त्याग और समर्पण से उनकी नींव मजबूत होती है. दंपति ने यह साबित किया है कि भक्ति के लिए धन से अधिक पवित्र मन और सच्ची श्रद्धा जरूरी है.

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आने वाली पीढ़ियों के लिए बनी प्रेरणा

समिति ने कहा कि आज के दौर में जहां लोग अपनी जरूरतों और भविष्य के लिए बचत को प्राथमिकता देते हैं, वहीं इस बुजुर्ग दंपति ने अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा प्रभु के चरणों में समर्पित कर अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है. उनका यह योगदान आने वाली पीढ़ियों को त्याग, संस्कार और धार्मिक आस्था की प्रेरणा देगा.

मंदिर न्यास निर्माण समिति ने दंपति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए प्रभु श्रीराम से उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. समिति ने कहा कि जब तक समाज में ऐसे श्रद्धालु और संस्कारवान लोग मौजूद हैं, तब तक आस्था की लौ इसी तरह प्रज्वलित रहेगी. महेश्वर प्रसाद सिंह और सरस्वती देवी द्वारा दिया गया 11 हजार रुपए का योगदान राशि से कहीं बड़ा है. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, त्याग और समर्पण की भावनात्मक मिसाल बन गया है. लोहरदगा में भी बुजुर्ग दंपति की इस पहल की सराहना हो रही है.

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लेखक के बारे में

By गोपी कृष्ण

गोपी कृष्ण वर्तमान में ब्यूरो प्रमुख हैं. समाज में व्याप्त समस्याओं, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, महिला उत्पीड़न, पलायन को लेकर काम में रूचि है. बहुत काम किया है.

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