कुड़ू-लोहरदगा. साल 2016 गुजरने वाला है. नये साल को यादगार बनाने के लिए कुड़ू के पिकनिक स्पाॅट सैलानियों के इंतजार में तैयार हैं. कुड़ू में कई पिकनिक स्पाॅट हैं, जहां सैलानी नये साल को यादगार बनाने के लिए पहुंचते हैं. कुड़ू से पांच किमी दूर कुनदो सुरक्षित वन क्षेत्र में बसे दुलदुलिया पतरा में चहचहाती पक्षियां एवं बहती नदी की मनोरम छटा देखते ही बनती है.
कुड़ू-चंदवा मुख्य पथ से टिको गांव से उत्तर दिशा की ओर दो किमी चल कर यहां पहुंचा जा सकता है. दामोदर नद का उदगम स्थल चूल्हापानी गांव पहाड़ों एवं जंगलो से घिरा है. कुड़ू से सलगी एवं सलगी से खमहार होते हुए चूल्हापानी पहुंच सकते हैं. महादेव मंडा सलगी जंगलों के बीच बसा है. चांपी-लुकइया मुख्य पथ के किनारे बसा है. सरकार इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए काम कर रही है.
चीरी पतरा लोहरदगा-कुड़ू मुख्य पथ के किनारे स्थित है. चीरी पतरा में हिरण पार्क बनाने की योजना सरकार के पास लंबित पड़ी है. वहीं कुड़ू से दो किमी दूर ऐतिहासिक टिको नदी तट में टिको नदी की मनोरम छटा देखते ही बनती है. नववर्ष में यहां लोग काफी संख्या में पहुंचते हैं
कुड़ू एवं चंदवा की सीमा पर स्थित क्रांति फाॅल को देखने के लिए झारखंड के अलावा बंगाल, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व बिहार समेत कई राज्यों से लोग आते थे, लेकिन उग्रवादियों की चहलदकमी व घटना के कारण यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में कमी आयी है. क्रांति फाॅल घने जंगलों के बीच बसा है.
पहाड़ों एवं चट्टानों के बीच कलकल करती नदी की धारा व चट्टानों से गिरते झरने को देख सैलानी बरबस क्रांति फाॅल की ओर खींचे चले आते हैं. इसके अलावा कुड़ू के तान पहाड़ी, सतबाहिनी सुकुरहुटू, दक्षिण कोयल नदी तट, उमरी पहाड़, जिंगी कोयल नदी व चडरी पहाड़ समेत कई ऐसे पिकनिक स्पाॅट हैं, जहां नववर्ष के मौके पर सैलानियों की भीड़ जमा होती है.
