सांपों को लेकर अंधविश्वास

सांप को लेकर लोगों में भय के साथ-साथ अंधविश्वास भी ज्यादा है. ग्रामीण इलाकों में सांप काटने के बाद लोग चिकित्सक के पास जाने के बजाय झांड़ फूंक पर ज्यादा ध्यान देते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग तरह-तरह की देसी उपचार का सहारा लेते हैं, लेकिन सभी उपचार नाकामयाब साबित होता है. जबकि सदर अस्पताल […]

सांप को लेकर लोगों में भय के साथ-साथ अंधविश्वास भी ज्यादा है. ग्रामीण इलाकों में सांप काटने के बाद लोग चिकित्सक के पास जाने के बजाय झांड़ फूंक पर ज्यादा ध्यान देते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग तरह-तरह की देसी उपचार का सहारा लेते हैं, लेकिन सभी उपचार नाकामयाब साबित होता है. जबकि सदर अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में एंटी स्नेक दवा उपलब्ध है.
ग्रामीण इलाकों में लगभग हर कार्यक्रम या बीमारी को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाता है, इसके बावजूद लोग अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं. लोगों का कहना है कि पर्यावरण असंतुलन एवं मशीनों के ज्यादा प्रयोग के कारण सांप अपने बिलों में रहने के बजाय लोगों के घरों तक पहुंच जा रहे हैं. बदला गांव में तो एक बच्ची को बिस्तर में मच्छरदानी लगे रहने के बावजूद सांप ने डंसा. बच्ची को सांप पांच बार डंसा और उसकी स्थिति काफी गंभीर हो गयी. लोग आनन-फानन में रांची लेकर गये. घरों में सांपों के घुसने की घटनाएं इस वर्ष ज्यादा देखी जा रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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