बेतला नेशनल पार्क से संतोष कुमार की रिपोर्ट
लातेहार.झारखंड के गौरव और देश के प्रमुख पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अंतर्गत आने वाले विश्व प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क से एक बेहद सकारात्मक और दूरगामी बदलाव की कवायद की शुरुआत की गयी है. अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान रखने वाले इस पार्क में अब पर्यटन को अधिक पेशेवर, वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय के अनुकूल बनाने की योजना है. पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध करने और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पीटीआर प्रबंधन ने स्थानीय युवाओं को पेशेवर सफारी व नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने की एक व्यापक योजना को धरातल पर उतारा है.इसी कड़ी में एक ऐतिहासिक अवसर पर पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन और ''''द नेचुरलिस्ट स्कूल'''' के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय आदिवासी समाज के युवक-युवतियों के लिए पांच दिवसीय विशेष ''''नेचर गाइड'''' प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य पार्क घूमने आने वाले देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को बेतला के गौरवशाली इतिहास, पलामू टाइगर रिजर्व की पारिस्थितिकी , वन्यजीवों के व्यवहार और स्थानीय वनस्पतियों के बारे में प्रामाणिक व वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है.
पांच दिनों में 60 घंटे की गहन ट्रेनिंग और कठिन फील्ड वर्क
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के कुशल निर्देशन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के तहत युवाओं को पांच दिनों में कुल 60 घंटे की अत्यंत गहन ट्रेनिंग दी गयी. इस प्रशिक्षण की खासियत यह रही कि इसमें केवल बंद कमरों में थ्योरी क्लासेस ही नहीं हुईं, बल्कि युवाओं को जंगल की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू कराने के लिए कठिन फील्ड वर्क भी कराया गया. इस पूरी मुहिम के तहत अब तक 50 से अधिक स्थानीय युवाओं को सफारी गाइड के रूप में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है. स्थानीय गांवों के ये युवा बचपन से इस जंगल के माहौल में पले-बढ़े हैं, इसलिए उनके पारंपरिक ज्ञान को इस ट्रेनिंग के जरिए वैज्ञानिक आधार दिया जा रहा है.
बेतला पहुंचे देश के दिग्गज मास्टर ट्रेनर्स
इस ट्रेनिंग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए ''''द नेचुरलिस्ट स्कूल'''' की तरफ से तीन बेहद अनुभवी और उच्च प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स विशेष रूप से बेतला पहुंचे थे. इन ट्रेनर्स ने युवाओं को तराशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया लेफ्टिनेंट कर्नल नंदिनी सेन (सेवानिवृत्त आर्मी अफसर)ने. इस पूरे ''''नेचर गाइड'''' कोर्स की कोर्स डायरेक्टर के रूप में इन्होंने अपनी देखरेख में अत्यंत कड़े अनुशासन के साथ प्रशिक्षण को संचालित किया. सैन्य पृष्ठभूमि के कारण उन्होंने युवाओं में समयबद्धता और पेशेवर कड़ाई का भाव जगाया.
पर्यावरण संतुलन में हर छोटे-बड़े जीव की भूमिका
प्रकृति सुब्रमण्यम ने इन्होंने युवाओं को प्रकृति और पर्यावरण की बारीक कड़ियों से अवगत कराया. पर्यावरण संतुलन में हर छोटे-बड़े जीव की भूमिका को वैज्ञानिक ढंग से समझाया.सिद्धेश जे शंकर ने इन्होंने फील्ड वर्क और जंगल सफारी से जुड़े तकनीकी पहलुओं का व्यावहारिक ज्ञान दिया. सफारी के दौरान सुरक्षा, ट्रैकिंग और आपातकालीन प्रबंधन के गुर सिखाये.प्रशिक्षण के समापन पर इन मास्टर ट्रेनर्स ने सभी युवाओं को जंगल सफारी के दौरान काम आने वाली विशेष गाइडिंग किट भी प्रदान की, जो उनके आने वाले व्यावसायिक करियर में बेहद मददगार साबित होगी.
क्या-क्या सीखा स्थानीय युवाओं ने?
इस 60 घंटे के गहन प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय गाइडों को प्रकृति और वन्यजीवों की उन बारीकियों से रूबरू कराया गया, जिनसे वे अब तक अनजान थे. फ्लोरा और फौना (वनस्पतियां और जीव-जंतु) क युवाओं को बेतला के पेड़-पौधों, विभिन्न दुर्लभ पक्षियों और जानवरों की सटीक व वैज्ञानिक पहचान करना सिखाया गया, ताकि वे पर्यटकों को सही नाम और प्रजाति बता सकें. वहीं पलामू के जंगलों में छिपी पारंपरिक जड़ी-बूटियों के महत्व और उनकी उपयोगिता को समझने पर विशेष जोर दिया गया. यह ज्ञान बेतला की अनूठी विरासत को पर्यटकों के सामने प्रदर्शित करने में मदद करेगा.देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के साथ विनम्र, पेशेवर और सुरक्षित व्यवहार करने के तौर-तरीके सिखाए गए. इसमें संवाद कौशल और पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि रखने की सीख शामिल है.
''''ऑफ-सीजन'''' का बेहतरीन सदुपयोग, अक्टूबर की तैयारी
फिलहाल मानसून के मौसम और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी पूरी तरह से बंद है. आमतौर पर इस समय को पर्यटन के लिहाज से ''''ऑफ-सीजन'''' माना जाता है, लेकिन पीटीआर प्रबंधन ने इस समय का उपयोग युवाओं की क्षमता निर्माण के लिए करने की दूरदर्शी सोच दिखाई है. प्रबंधन की सोच है कि एक अक्टूबर से जैसे ही पार्क में नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हो और जंगल सफारी दोबारा बहाल की जाए, उससे ठीक पहले ये सभी सफारी गाइड पूरी तरह से तैयार और मानसिक रूप से सुसज्जित हो चुके हों.
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स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया पंख
इस अनूठी पहल का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन और आदिवासी समाज का सशक्तिकरण है. बेतला और पलामू टाइगर रिजर्व के आस-पास के गांवों में रहने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण आत्मनिर्भरता का एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है. जब स्थानीय आदिवासी युवक-युवतियों को सीधे पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जायेगा, तो वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि खुद को जंगल और वन्यजीवों के रक्षक के रूप में भी देखेंगे. इससे स्थानीय समुदायों और वन विभाग के बीच समन्वय बेहतर होगा, जिससे अवैध शिकार और वनों की कटाई जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी.आगामी पर्यटन सीजन में बेतला आने वाले पर्यटकों को निश्चित रूप से एक बदला हुआ और अधिक ज्ञानवर्धक माहौल देखने को मिलेगा, जहां स्थानीय युवा अपनी माटी की विरासत से दुनिया को रूबरू कराते नजर आएंगे.\\
विधायक ने किया सर्टिफिकेट और विशेष किट सौंपकर सम्मानित
मनिका विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचंद्र सिंह ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी युवक-युवतियों को ''''नेचर गाइड'''' का आधिकारिक सर्टिफिकेट और विशेष किट सौंपकर सम्मानित किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना एक सराहनीय कदम है.
स्थानीय युवा ही जंगल के सच्चे संरक्षक: उपनिदेशक
पलामू टाइगर रिजर्व (उत्तरी प्रमंडल) के उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य स्थानीय आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें वन्यजीव संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ना है. ये युवा गाइड बेतला आने वाले पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध करेंगे और स्थानीय इको-टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में मील का पत्थर साबित होंगे. वन विभाग भविष्य में भी ऐसे रोजगारपरक और कौशल विकास कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करता रहेगा.
