सरकार आदिवासी स्वायत्तता को कमजोर कर रही है : आर्यन उरांव

सरकार आदिवासी स्वायत्तता को कमजोर कर रही है : आर्यन उरांव

By SHAILESH AMBASHTHA | January 12, 2026 10:52 PM

लातेहार ़ झारखंड सरकार द्वारा लागू की गयी नयी पेसा नियमावली के खिलाफ सोमवार को लातेहार जिला समाहरणालय के समक्ष आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने उग्र प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की धारा-3 के तहत बनायी गयी नियमावली को असंवैधानिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पंचायत राज मंत्री दीपिका पाण्डेय, संबंधित वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, लातेहार विधायक प्रकाश राम तथा पेसा नियमावली से जुड़े जनप्रतिनिधियों के पुतले दहन कर आक्रोश व्यक्त किया गया. ग्राम सभा नहीं, उपायुक्त केंद्रित है नयी नियमावली : मंच के वक्ताओं ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय के 29 जुलाई 2024 के आदेश के बावजूद सरकार ने संसद के ””””पेसा अधिनियम 1996”””” के अनुरूप स्वतंत्र नियमावली नहीं बनायी. आरोप लगाया गया कि सरकार ने ग्राम सभा को अधिकार देने के बजाय ””””उपायुक्त-केंद्रित”””” व्यवस्था लागू कर दी है. यह अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के स्वशासन और जल-जंगल-जमीन के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है. स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश : प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मंच के प्रमुख आर्यन उरांव ने कहा कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सर्वोच्च इकाई बनाना है. लेकिन सरकार सामान्य पंचायत और नगरपालिका व्यवस्था को जबरन थोपकर आदिवासी स्वायत्तता को कमजोर कर रही है. यह उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने आदिवासी अधिकारों के लिए बलिदान दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अविलंब ग्राम सभा-केंद्रित स्वतंत्र नियमावली नहीं बनी, तो आंदोलन को पूरे राज्य में उग्र किया जायेगा. प्रदर्शन में मौजूद लोग : इस मौके पर मुख्य रूप से फूलदेव लोहरा, वासदेव लोहरा, प्रेम गंझू, महावीर गंझू समेत आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के दर्जनों सदस्य और काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है