वसीम अख्तर की रिपोर्ट
लातेहार. महुआडांड़ प्रखंड मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर किता गांव के करीब 50 परिवार बरसात में सड़क संपर्क कट जाने की समस्या झेल रहे हैं. रामपुर नदी पर बने पुल का पहुंच पथ वर्ष 2017 में आई बाढ़ में बह गया था. नौ वर्ष बीत जाने के बाद भी अप्रोच पथ का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बरकरार है.
बारिश शुरू होते ही पहाड़ी रामपुर नदी उफान
रामपुर से विश्रामपुर होते हुए नगर प्रतापपुर गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क पर रामपुर नदी का यह पुल ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख साधन है. गर्मी और ठंड के मौसम में ग्रामीण किसी तरह इस रास्ते से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही पहाड़ी रामपुर नदी उफान पर आ जाती है. अचानक बाढ़ आने पर किता गांव का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है. संपर्क टूटने से ग्रामीणों को इलाज, बाजार और रोजमर्रा की जरूरी सामग्री के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है.
नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
इस रास्ते से किता के अलावा कुरो कला, विश्रामपुर, नगर प्रतापपुर, परहाटोली और डूमरडीह के ग्रामीण भी आवागमन करते हैं. इन गांवों के सैकड़ों स्कूली बच्चे प्रतिदिन प्रखंड मुख्यालय स्थित स्कूलों में पढ़ने आते-जाते हैं.
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बना रहता है हादसे का खतरा
अप्रोच पथ नहीं होने के कारण कई बार बच्चों को नदी के पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. पहाड़ी क्षेत्र से आने के कारण ऊपरी इलाकों में बारिश होने पर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पानी का बहाव तेज हो जाता है. ऐसे में बच्चों और ग्रामीणों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है.
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ग्रामीणों ने जल्द निर्माण की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का पहुंच पथ नहीं होने से हर साल बरसात में उन्हें इसी समस्या का सामना करना पड़ता है. लंबे समय से निर्माण की मांग के बावजूद अब तक समाधान नहीं हुआ है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से रामपुर नदी पुल के क्षतिग्रस्त पहुंच पथ का जल्द निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बरसात के दिनों में गांवों का संपर्क बाधित न हो और बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करना पड़े.
