नक्सलियों का सफाया होते ही दुर्लभ वन्यजीवों के तस्करों ने जमाया डेरा

नक्सलियों का सफाया होते ही दुर्लभ वन्यजीवों के तस्करों ने जमाया डेरा

बेतला़ बूढ़ा पहाड़ से लाल आतंक का साया हटते ही अब वहां दुर्लभ वन्यजीवों के तस्कर सक्रिय हो गये हैं. इस अवैध कारोबार में अंतर्राज्यीय गिरोह के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बड़ा नेटवर्क जुड़ा हुआ है. हाल के दिनों में वाइल्डलाइफ कंट्रोल ब्यूरो ऑफ इंडिया और पीटीआर (पलामू टाइगर रिजर्व) की कार्रवाई से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि तस्करों के निशाने पर अति दुर्लभ ””””पेंगोलिन”””” (वज्रकीट) है. इसे आइयूसीएन ने अपनी ””””रेड लिस्ट”””” में गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में रखा है. नक्सली पकड़ ढीली पड़ते ही तस्करों ने फैलाया जाल : लातेहार, पलामू और गढ़वा जिलों में फैला बूढ़ा पहाड़ और पीटीआर का दुर्गम इलाका कभी नक्सलियों का अभेद्य किला था. नक्सल प्रभाव के कारण यह क्षेत्र वनकर्मियों और बाहरी तस्करों की पहुंच से बाहर था. लेकिन सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद नक्सलियों के पैर उखड़ते ही तस्करों ने स्थानीय लोगों की मदद से दुर्लभ जीवों के अवैध व्यापार का जाल बिछा दिया है. पिछले दो माह के भीतर वन विभाग ने करीब 15 किलोग्राम पेंगोलिन शल्क जब्त कर एक दर्जन अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा है. पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा : पेंगोलिन दीमक और चींटियों को खाकर मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. बेतला और आसपास के इलाकों में 10 साल पहले इनकी काफी भरमार थी, लेकिन तस्करी के कारण इनकी आबादी तेजी से घट रही है. पीटीआर प्रबंधन जहां बाघों के संरक्षण में जुटा है, वहीं ये शिकारी प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं. हालिया छापेमारी में पेंगोलिन शल्क के साथ सांप का जहर भी बरामद किया गया था. पैंगोलिन के शल्क कब- कब किया गया बरामद 20 नवंबर 2025 -सात किग्रा 24 नवंबर 2025- ढाई किग्रा 27 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के बलरामपुर से चार किग्रा 12 जनवरी 2026 चार किग्रा

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Published by: Shailesh ambashtha

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