. मौलानाओं ने कहा-मंदिर को ठेस पहुंचे, तो मुस्लिम को दर्द हो, मस्जिद को नुकसान हो तो हिंदू को दर्द हो
बालूमाथ. मासियातू गांव के मदरसा अशरफुल उलूम में शुक्रवार की शाम जलसा ए दस्तारबंदी और तालीमी बिरादरी कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ. यह कार्यक्रम आपसी भाईचारे और सद्भाव की मिसाल बना. नातिया कलाम के दौरान मंच पर मौजूद हिंदू भाइयों ने मौलाना को पुरस्कार देकर प्रेम और एकता का संदेश दिया. कार्यक्रम की शुरुआत बिहार से आये मौलाना अब्दुल्लाह सलीम चतुर्वेदी, हाफिज जमालुद्दीन, कारी मो इस्लाम, कारी शोएब और मौलाना सुफियान हैदर की संयुक्त तिलावत से हुई. अतिथियों ने कहा कि कुरान हमें इंसानियत, प्रेम और सद्भाव का रास्ता दिखाता है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मंदिर को नुकसान पहुंचे तो मुस्लिम को दर्द हो और मस्जिद को नुकसान पहुंचे तो हिंदू को दर्द हो, यही सच्ची इंसानियत है.
यूपी से आये मशहूर नातख़्वां दिल खैराबादी ने एक से बढ़कर एक नातिया कलाम पेश किए. इस अवसर पर 29 बच्चों ने हाफिज़-ए-क़ुरान की उपाधि प्राप्त की, जो शिक्षा और धार्मिक ज्ञान की बड़ी उपलब्धि है. जलसा के दौरान तीन निकाह भी संपन्न कराए गए. कार्यक्रम की सदारत मो कबीर ने की.
इस मौके पर रवींद्र कुमार साव, राजेंद्र वैद्य, दिनेश यादव, जलेसर यादव, उदय यादव, फूलचंद ठाकुर, बृजेश उरांव, मास्टर आरिफ, मुनाजिर हुसैन, मो नौशाद, मुफ्ती सनाउल्लाह, मुमताज आतीफ, सफीउर रहमान, कारी मो खुर्शीद, कारी नेसार, मौलाना रिजवान, खालिद नदवी, मो सनाउल्लाह, मो रईस, मो नवाब, जुनैद अनवर, मुजम्मिल हुसैन, मो इमरान, मौलाना जियाउल्लाह, मो नईम, मौलाना जुबैर, मो सादिक, अकीब खान, मो इरफान अली, मो नैय्यर, शाहिद अंसारी, छोटू कुरैशी, जसीम सिद्दीकी, मो शोएब अंसारी सहित सैकड़ों अलीम उलेमा और स्थानीय लोग मौजूद रहे.
