शहरी जलापूर्ति योजना
दो जलमीनार पड़े हैं बेकार
लातेहार : लातेहार शहर में तीन जलमीनार होने के बावजूद लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. मात्र एक जलमीनार से ही पानी की सप्लाई होने से शहरी जलापूर्ति योजना का लाभ मात्र 6000 लोगों को मिल पा रहा है. यदि तीनों जलमीनार से जलापूर्ति होती करीब 25000 लोगों को पीने का साफ पानी मिलता. गरमी आते ही औरंगा नदी सूखने लगती है, जिससे पानी की विकट समस्या उत्पन्न हो जाती है. इन तीनों जलमीनारों में पानी औरंगा नदी से ही पहुंचाने की व्यवस्था की गयी है.
शहर में जलापूर्ति के लिए 50 हजार एवं 30 हजार गैलन क्षमता की दो जलमीनारें हैं. लेकिन सिर्फ 50 हजार गैलन क्षमता वाले जलमीनार में पानी चढ़ पाता है. दूसरे जलमीनार तक पानी नहीं पहुंच पाता है. विभागीय अधिकारियों की मानें तो दोनों जलमीनार चालू हालत में है.
आलम यह है कि पिछले एक पखवाड़े से शहर के कई भागों में सप्लाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है. लोग पानी के लिए अहले सुबह ही लाइन लगते हैं और जब पानी आता है, तो महज दो-चार बालटियां भरने के बाद चला जाता है.
इस संबंध में लोगों ने विभागीय अधिकारियों से शिकायत की. जांच में शहर के 54 आवासीय कनेक्शनों में पानी कम आने की बात सही पायी गयी. इसके बाद विभाग को उनके जल कर को न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कम भी करना पड़ा.
शहर के डुरूआ वार्ड में 50 हजार गैलन क्षमता वाली जलापूर्ति योजना है. लेकिन वहां भी नियमित जलापूर्ति नहीं होती है.इसके अलावा मनिका में 30 हजार गैलन की जलापूर्ति योजना संचालित है, लेकिन नियमित जलापूर्ति नहीं होने से लोग पानी के लिए भटकते नजर आते हैं. बरवाडीह, गारू, छीपादोहर, महुआडांड़, चोरमुंडा में जलापूर्ति योजनाएं मृत प्राय हो चुकी हैं, वहां न तो जलमीनार बनाया गया है और न ही पानी साफ करने के लिए कोई मुक्कमल व्यवस्था ही की गयी है. चंदवा, बालूमाथ एवं बारियातू में 30-30 हजार गैलन क्षमता की योजनाओं का काम प्रगति पर है.
