रेहड़ा रोड पर एप्रोच रोड, बहा पुल ध्वस्त
सुनील कुमार
लातेहार : जिले में ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) जो पहले आरइओ के नाम से जाना जाता था, द्वारा पिछले छह माह में बनायी गयी करीब 50 करोड़ रुपये की लागत की ग्रामीण सड़कें पहली ही बरसात में गुणवत्ता की पोल खोल रही है. बताया जाता है करोड़ों रुपये की लागत से बनायी गयी सड़कों की हालत खस्ता हो गयी है.
घटिया निर्माण सामग्री एवं प्राक्कलन के मुताबिक कार्य नहीं होने से पहली बरसात भी सड़क व पुल नहीं झेल पा रही है. छह करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बरवाडीह-छीपादोहर मार्ग की ऐसी हालत हो गयी है कि रोड हैंडओवर होते ही सड़क पर गड्डे ही गड्डे हो गये हैं.
मुरूप-मनोहर पथ की लागत करीब तीन करोड़ की लेकिन योजना स्थल पर काम महज करोड़ रुपये का ऐसी ही स्थिति मोहनपुर-तासू रोड की है. जहां निर्माण के कुछ माह बाद भी वाहनों का आवागमन सुलभ नहीं हो सका. लगभग 1.30 करोड़ रुपये की लागत से निमार्णाधीन लातेहार-पोचरा भाया इचाक पथ की मरम्मत कार्य की भी स्थति दयनीय है. मरे हुए पत्थरों से ग्रेड वन करने के बाद सड़कों की ग्रेडिंग भी नहीं की जा रही है.
तरवाडीह देवी मंडप से पीडब्ल्यूडी रोड तक लगभग 1.20 करोड़ रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. जो पहली बरसात में मिट्टी की सड़क की भांति हो गया है. लगभग 2.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बैगानधार वीर बुधु भगत की प्रतिमा से धनकारा मोड़ तक सड़क की हालत अति दयनीय है, जबकि सड़क का निर्माण हुए महीना भी नहीं हुआ है.
बताया जा रहा है कि मृत पत्थरों की हैंड ब्रोकेन चिप्स का अधिकांश उपयोग किया जा रहा है तथा मात्रा से काफी कम अलकतरा का उपयोग किया जा रहा है. ग्रामीण कार्य विभाग पर प्रशासनिक हस्तक्षेप शून्य हो गया है. उपायुक्त की जनता दरबार में ग्रामीणों ने आरइओ की सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित कई शिकायतें की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं : मुख्य अभियंता
ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता विजयकांत सिंह ने पूछने पर बताया कि लातेहार में गुणवत्तायुक्त कार्य संपादित किये जायेंगे. गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा. उन्होंने कहा कि कार्यों की समीक्षा की जा रही है जांच के बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा.
इन कार्यों में है अधिक गड़बड़ी
सनवार से पेशरार पेचेगढ़ा तक पीसीसी एवं ग्रेड वन एक किमी लंबी सड़क का निर्माण 62 लाख रुपये से कराया गया है. लेकिन एक माह भी सड़क ठीक नहीं रही. कोपे जगतू-जेरूआ मुख्य पथ पर पीसीसी का निर्माण 24 लाख रुपये लागत से किया गया है जो लगभग बह चुका है.
मटलौंग मुख्य पथ से परसही बंदुआ तक पीसीसी पथ का निर्माण 48 लाख रुपये से कराया गया है जहां खानापूर्ति की गयी है. जोरी सखुआ से दोरम तक 16 लाख से पीसीसी पथ का निर्माण कराया गया.
इसकी लंबाई कम है फिर भी संवेदक को भुगतान किया गया. विभागीय अधिकारी योजनाओं में लूट मचाये हुए हैं. बताया जाता है कि जिला स्तरीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति आरइओ को प्राप्त है, जिसके कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है.
