कोडरमा : सावन का महीना शुरू होते ही शिवभक्ति पूरे शबाब पर है. हर ओर से 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर जलाभिषेक के लिए निकल पड़े हैं.
कोई पैदल तो कोई वाहन से अपनी आस्था की यात्रा पूरी कर रहा है, लेकिन इस यात्रा को सहज और सुखद बनाने के लिए समाज के कई लोग भी नि:स्वार्थ सेवा में जुटे हैं. ऐसी ही एक मिसाल झुमरीतिलैया के बाईपास रोड स्थित महाराणा प्रताप चौक के समीप बाबा निवास शिव वाटिका में देखने को मिल रही है, जहां पिछले 14 वर्षों से कांवरियों की सेवा को ही शिवभक्ति का सबसे बड़ा माध्यम माना जा रहा है.
सावन लगते ही शिव वाटिका में कांवरियों की आवाजाही बढ़ गई है. यहां देवघर जाने वाले और जलाभिषेक कर लौटने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चाय, शुद्ध पेयजल, भोजन तथा रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है़ दिन-रात चल रही इस सेवा का लाभ बड़ी संख्या में श्रद्धालु उठा रहे हैं.
सेवा में लगे स्वयंसेवक पूरी आत्मीयता के साथ प्रत्येक कांवरिया का स्वागत कर रहे हैं. बाबा निवास शिव वाटिका के संचालक सुजीत लोहानी बताते हैं कि यह सेवा किसी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि बाबा भोलेनाथ की कृपा और श्रद्धालुओं के प्रति समर्पण की भावना से शुरू की गई थी.
वर्षों पहले देवघर यात्रा के दौरान कांवरियों को होने वाली कठिनाइयों को देखकर उन्होंने सेवा का संकल्प लिया़ आज यह सेवा निरंतर 14वें वर्ष में भी जारी है़ उनका कहना है कि बाबा भोले के भक्तों की सेवा ही सच्ची शिवभक्ति है और जब तक बाबा की कृपा रहेगी, यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा़
भक्ति, सेवा और अपनापन का अद्भुत संगमशिव वाटिका केवल विश्राम स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी बन चुका है. शुक्रवार रात मानव कल्याण सेवा परिवार, चक्रधरपुर के कांवरियों का जत्था यहां पहुंचा तो सेवकों ने पूरे उत्साह के साथ उनका स्वागत किया.
श्रद्धालुओं को बैंक्वेट हॉल में बैठाकर चाय और पानी उपलब्ध कराया गया़ इसके बाद आकर्षक शिव दरबार में पुजारी सत्यनारायण पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना कराई़ पूजा के उपरांत भजन गायक राजा चौरसिया और उनकी टीम ने भगवान शिव एवं माता रानी के भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी़ भक्ति संगीत की स्वर लहरियों पर कांवरिए झूम उठे.
लंबी यात्रा की थकान पलभर में दूर हो गई और पूरा वातावरण शिवमय हो गया़ कार्यक्रम के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया तथा रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था भी की गई़
सावन में सेवा की बढ़ रही परंपरासावन के दौरान जिले में कई स्थानों पर कांवरियों की सेवा की परंपरा देखने को मिलती है, लेकिन शिव वाटिका की विशेषता इसकी निरंतरता और समर्पण है. बिना किसी भेदभाव के हर श्रद्धालु के लिए यहां भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था की जाती है.
यही कारण है कि देवघर जाने वाले अनेक कांवरियों के लिए यह स्थान अब आस्था और विश्वास का स्थायी पड़ाव बन चुका है़ सावन के इस पावन अवसर पर शिव वाटिका यह संदेश भी दे रही है कि भगवान शिव तक पहुंचने का मार्ग केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि मानव सेवा से भी होकर जाता है. कांवरियों के चेहरे पर संतोष और सेवा में जुटे लोगों की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' की भावना आज भी समाज में जीवंत है.
