झुमरीतिलैया: सावन के पावन महीने में मारवाड़ी समाज की पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों की मनोहारी झलक देखने को मिल रही है. राजस्थानी समाज के घरों में सावन सिंधारा उत्सव मनाया जा रहा है. महिलाओं व युवतियों ने हाथों में मेहंदी रचाकर, हरी साड़ियों और रंग-बिरंगी चूड़ियों से सजकर सावन का उल्लास साझा किया. घर के बड़े-बुजुर्गों ने बहू-बेटियों का सिंधारा कर उन्हें उपहार और शुभकामनाएं दीं.
कार्यक्रमों में राजस्थानी लोकगीत, पारंपरिक संगीत और नृत्य की धूम रही. तीज पर्व से पहले बहू-बेटियों का सिंधारा करने की पुरानी परंपरा है. मायके से बेटियों और ससुराल में बहुओं के लिए शृंगार सामग्री, वस्त्र, मिठाई व फल सहित पसंदीदा सामान भेजे जाते हैं. अग्रवाल, माहेश्वरी, मारवाड़ी ब्राह्मण सहित विभिन्न संगठनों की ओर से आयोजन किये जा रहे हैं.
इधर, 25 अगस्त को पानी टंकी रोड स्थित श्री राणी सती सेवा सदन में राणी सती दादी का सिंधारा एवं मंगल पाठ होगा. दादी जी को सवा मणि छप्पन भोग अर्पित किया जायेगा. मारवाड़ी युवा मंच की प्रेरणा शाखा व श्री राणी सती मंदिर में मां की लाडली के तत्वावधान में भी सिंधारा कार्यक्रम हुआ.
