सुजल भदानी की रिपोर्ट
झुमरीतिलैया. वर्ष 2027 में होने वाली मैट्रिक, इंटर, मध्यमा और मदरसा परीक्षाओं के लिए परीक्षा फॉर्म भरने में अब परमानेंट एजुकेशन नंबर (पेन) और यू-डाइस कोड अनिवार्य होगा. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने कोडरमा समेत राज्य के सभी स्कूलों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है.
डुप्लीकेट पंजीयन पर लगेगी रोक
जैक के निर्देश के अनुसार, पेन और यू-डाइस कोड के बिना विद्यार्थियों का पंजीयन और परीक्षा फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य डुप्लीकेट पंजीयन पर रोक लगाना, विद्यार्थियों का एकीकृत डाटाबेस तैयार करना और शैक्षणिक आंकड़ों को अधिक सटीक बनाना है.
कोडरमा में हर साल 25 से 30 हजार विद्यार्थी
कोडरमा जिले में हर साल करीब 25 से 30 हजार विद्यार्थी मैट्रिक, इंटर और मदरसा परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरते हैं. ऐसे में नयी व्यवस्था का सीधा असर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों पर पड़ेगा.
30 सितंबर तक पेन उपलब्ध कराने का निर्देश
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश के बाद जैक ने सभी प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों को 30 सितंबर तक विद्यार्थियों का पेन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी है. यू-डाइस पोर्टल पर विद्यार्थी का डेटा अपलोड होने के बाद पेन स्वतः जनरेट हो जाता है. स्कूलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी विद्यार्थियों का डेटा समय पर पोर्टल पर अपलोड हो.
बिना यू-डाइस कोड वाले स्कूलों को भी निर्देश
जिन शिक्षण संस्थानों के पास यू-डाइस कोड नहीं है, उन्हें तत्काल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेइपीसी) से कोड प्राप्त करने को कहा गया है. इधर, जिले में कुछ ऐसे स्कूल भी हैं, जिनके पास यू-डाइस कोड नहीं है. ऐसे संस्थान आसपास के मान्यता प्राप्त स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों का परीक्षा फॉर्म भरवाने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि, जैक की नयी व्यवस्था के बाद इस तरह की प्रक्रिया में भी पेन और यू-डाइस कोड की आवश्यकता होगी.
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विद्यार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित
जैक का मानना है कि पेन और यू-डाइस को अनिवार्य करने से विद्यार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. इससे डुप्लीकेट पंजीयन पर रोक लगाने के साथ परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी. इसके अलावा विद्यार्थियों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर शिक्षा की योजनाएं तैयार करने में भी सुविधा होगी. जैक के अनुसार, नयी व्यवस्था से जीइआर, एनइआर और ड्रॉपआउट दर जैसे शैक्षणिक सूचकांकों में सुधार लाने में भी मदद मिल सकती है.
