कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट
Koderma News: कोडरमा के मुख्य लोको निरीक्षक सह क्रू लॉबी इंचार्ज बंगाली चंपिया की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मृतक की पत्नी द्वारा धनबाद मंडल के वरीय मंडल विद्युत अभियंता (परिचालन) रजत कुमार सिंह के खिलाफ प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराए जाने के बाद ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (अलरसा) भी खुलकर सामने आ गया है. संगठन ने पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही आवश्यकता पड़ने पर जांच सीआईडी या सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की भी मांग उठाई है.
महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग
अलरसा के मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक से मुलाकात कर कहा कि बंगाली चंपिया की मौत ने न सिर्फ धनबाद मंडल बल्कि पूरे भारतीय रेलवे के लोको रनिंग स्टाफ को झकझोर दिया है. संगठन का कहना है कि मृतक की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत बेहद गंभीर प्रकृति की है. ऐसे में मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.
जांच होने तक संबंधित अधिकारियों को हटाने की मांग
ज्ञापन में संगठन ने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है, उन्हें जांच पूरी होने तक प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग रखा जाए. संगठन का कहना है कि यदि आरोपी अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं तो जांच प्रभावित होने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. अलरसा ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका अथवा लापरवाही सामने आती है तो रेलवे सेवा नियमों और प्रचलित कानून के तहत उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
सीआईडी या सीबीआई जांच पर दिया जोर
रेलकर्मी संगठन ने अपने ज्ञापन में कहा कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है. यदि रेलवे स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं हो तो राज्य की सीआईडी अथवा आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई को जांच सौंपी जाए. इससे कर्मचारियों का जांच प्रक्रिया पर विश्वास बना रहेगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी.
मृतक परिवार को अनुकंपा नियुक्ति की मांग
संगठन ने रेलवे प्रशासन से मृतक बंगाली चंपिया के परिवार को सभी लंबित सेवा लाभों का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है. इसके अलावा आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने तथा परिवार को हरसंभव आर्थिक और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है.
धनबाद मंडल की क्रू लॉबियों में हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन
इधर, संगठन के आह्वान पर बुधवार को धनबाद रेल मंडल की विभिन्न क्रू लॉबियों में लोको रनिंग स्टाफ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और दिवंगत बंगाली चंपिया को श्रद्धांजलि अर्पित की. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, सीआईडी या सीबीआई जांच और मृतक परिवार को जल्द न्याय दिलाने की मांग दोहराई. इस दौरान आशुतोष कुमार, रंजीत कुमार, अमरदीप, बिपिन, अजित कुमार, पंकज कुमार, अभिषेक कुमार, सुशील कुमार, अजय कुमार, सुजेश कुमार, अनुज कुमार सहित बड़ी संख्या में रेलकर्मी मौजूद रहे.
बेहद अनुभवी अधिकारी थे बंगाली चंपिया
सहकर्मियों ने बताया कि बंगाली चंपिया तकनीकी रूप से अत्यंत दक्ष और अनुभवी लोको निरीक्षक थे. रेलकर्मियों के अनुसार वे इंजन की आवाज सुनकर ही उसकी खराबी का अनुमान लगा लेते थे. उनकी तकनीकी समझ और कार्यशैली के कारण उन्हें धनबाद रेल मंडल के सबसे कुशल लोको निरीक्षकों में गिना जाता था.
मानव बल की कमी से बढ़ रहा दबाव
रेल कर्मचारियों ने इस अवसर पर रेलवे में बढ़ते कार्यभार का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि गार्ड और लोको पायलटों की भारी कमी के कारण कई बार कर्मचारियों को निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी के बजाय 10 से 12 घंटे तक लगातार काम करना पड़ता है. यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है, बल्कि रेल सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है. रेलकर्मियों ने बताया कि कई रेल मंडलों में चालक निर्धारित ड्यूटी अवधि पूरी होने के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेन आगे ले जाने से भी इनकार कर चुके हैं. हाल ही में पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के कोडरमा दौरे के दौरान भी कर्मचारियों ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था.
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मुख्य लोको निरीक्षक का क्या है काम
रेलवे के जानकारों के अनुसार, मुख्य लोको निरीक्षक प्रशासन और लोको पायलटों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं. उन्हें एक ओर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कराना होता है. वहीं दूसरी ओर, कर्मचारियों की ड्यूटी और परिचालन का समन्वय भी करना पड़ता है. ऐसे में सीमित मानव बल के बीच लगातार बढ़ता कार्यभार उनके ऊपर अतिरिक्त मानसिक दबाव पैदा कर रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो भविष्य में परिचालन और सुरक्षा दोनों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
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