चार्जशीटेड शिक्षक के विरुद्ध पहले भी लगे हैं कई गंभीर आरोप
कोडरमा : सरकार व विभागीय सिस्टम किस तरह काम करता है, यह कोडरमा में दिखता है. पहले से ही घोटालों, अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी के लिए चर्चित इस जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग से नये मामले उभर कर सामने आ रहे हैं. वह भी पारा शिक्षकों से जुड़ा हुआ है. इसके बावजूद हर तरफ सन्नाटे का आलम है, कार्रवाई के नाम पर कागज व फाइल इधर से उधर दौड़ रहे हैं.
पहले कोडरमा के सतगावां में पारा शिक्षकों द्वारा फरजी प्रमाणपत्र बनवाने की बात सामने आयी, तो अब लगातार कुछ पारा शिक्षकों द्वारा अवैध शराब के धंधे में शामिल होने की बात खुल कर सामने आ रही है. इसके बावजूद शिक्षा विभाग व पूरा सिस्टम बेबस दिख रहा है. नया मामला नव प्राथमिक विद्यालय गरहा, डोमचांच का है.
मसनोडीह पंचायत के इस विद्यालय में पिछले तीन दिनों से पठन पाठन बंद होकर ताला लटका था, जबकि सचिव सह पारा शिक्षक दिनेश कुमार गायब थे. मामला प्रभात खबर ने प्रमुखता से उठाया तो खलबली मच गयी. अब पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि उक्त पारा शिक्षक पर पहले से भी कई गंभीर आरोप हैं, पर हर बार कार्रवाई की जगह उक्त मामले को दबा दिया गया. हालांकि बीच-बीच में शिक्षा विभाग के अधिकारिरयों ने पत्राचार का कोरम जरूर पूरा किया.
जानकारी के अनुसार, पारा शिक्षक दिनेश कुमार के विरुद्ध उत्पाद विभाग ने अवैध शराब बरामदगी को लेकर चार्जशीट तो बाद में दाखिल किया, इसके पूर्व उन पर भवन निर्माण की हजारों की राशि की गड़बड़ी करने, अपना योग्यता प्रमाणपत्र मांगे जाने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराने, मध्याहन भोजन की राशि में हेरफेर करने के आरोप लगे हैं. इन मामलों को लेकर समय-समय पर कार्रवाई के नाम पर कोरम पूरा किया गया. बताया जाता है कि पारा शिक्षक के कुछ लोगों से बेहतर संबंध के कारण हर बार मामला दबता गया.
ऐसी-ऐसी मनमानी हुई
स्पष्टीकरण के बावजूद नहीं जमा किया प्रमाणपत्र, शैक्षणिग कार्य से अलग रखने का था आदेश शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान फरजी प्रमाणपत्र का मामला सामने आया, तो शिक्षा विभाग ने पूरे जिले के पारा शिक्षकों की योग्यता प्रमाणपत्र जांच करने का निर्णय लिया. सभी को प्रमाणपत्र जमा करने को कहा गया, पर तीन पारा शिक्षकों ने इसे जमा नहीं किया.
विभाग ने दिनेश कुमार सहित तीन शिक्षकों को 30 नवंबर 2015 को पत्र लिखते हुए 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा. प्रमाणपत्र जमा नहीं होने पर कार्रवाई तक की बात कही गयी. पत्रांक 1187 में डीएसइ ने लिखा है कि यह बहुत खेद की बात है कि आप विभागीय निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं. बावजूद इसके प्रमाणपत्र जमा नहीं हुआ. बाद में विभाग ने वेतन निकासी का निर्देश जारी किया. ऐसे शिक्षक के विरुद्ध सात जनवरी 2016 को बीइइओ को कहा गया कि अगर 10 जनवरी तक निर्देश का पालन नहीं होता है तो इन्हें शैक्षणिक कार्य से अलग रखें, पर इसका पालन ही नहीं हुआ.
उत्पाद विभाग ने वारंट के लिए किया अनुरोध
इधर, पारा शिक्षक दिनेश कुमार पिता चंद्रदेव पंडित के विरुद्ध अक्तूबर 2015 में अवैध शराब को लेकर हुई कार्रवाई के मामले में उत्पाद विभाग ने अदालत में वारंट के लिए अनुरोध किया है.
बताया जाता है कि विभाग की ओर से दाखिल चार्जशीट में आरोपी की पत्नी के साथ ही कुल छह गवाह बनाये गये हैं. अदालत ने 5-1-16 को 27(ए) उत्पाद अधिनियम के तहत मामले का संज्ञान लिया है. मामले में सम्मन भेजने की कार्रवाई की जा रही है.
खुला विद्यालय, पढ़ने आये बच्चे
इधर, पारा शिक्षक के आरोपों में घिरे होने व गायब रहने की खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने विद्यालय में दूसरे शिक्षक गणेशलाल मेहता को प्रतिनियुक्त किया था. शनिवार को मेहता ने विद्यालय खोला और पढ़ने के लिए बच्चे भी आये. मेहता इससे पहले एनपीएस लेवडा में नियुक्त थे.
भवन बनाया किसी और ने पैसे निकाल लिया इसने
जानकारी के अनुसार, गरहा के विद्यालय में वर्ष 2014 में बसंत पासवान नामक शिक्षक पदास्थापित थे. उन्हें सर्व शिक्षा से एक किचन व कमरा निर्माण कराना था. कुल 3 लाख 64 हजार के काम में से 64 हजार की राशि उनके रहते विद्यालय के खाते में नहीं आयी. इसके पहले उन्हें मूल विद्यालय जियोरायडीह बुला लिया गया.
इसके बाद गरहा में तेतरियाडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय से भेजे गये शिक्षक दिनेश कुमार ने खाते में आये भवन निर्माण की करीब 46 हजार 600 की राशि निकाल ली. इस राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है. बसंत पासवान ने पैसे की मांग की तो टालमटौल होता रहा. उन्होंने डीएसइ से शिकायत की तो दिनेश ने बीओआइ तिलैया का 23 हजार का चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया.
बातचीत में बसंत पासवान ने बताया कि वे अभी गोड्डा में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. पूरे मामले की शिकायत डीएसइ को लिखित तौर पर नवंबर 2015 में ही की गयी है. पारा शिक्षक पद विद्यालय के अध्यक्ष ने मध्याहन भोजन की राशि फरजी तरीके से निकासी का आरोप लगाया. जांच हुई, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं.
