पानी टंकी रोड से निकले मार्च में गौरी लंकेश के हत्यारों को गिरफ्तार करो, बोलने की आजादी पर रोक नहीं सहेंगे, सांप्रदायिक ताकत मुर्दाबाद, हत्या की राजनीति बंद करो, प्रगतिशील पत्रकारों, नागरिकों को सुरक्षा दो, भगवा गुंडागर्दी नहीं चलेगी आदि नारे लगाये जा रहे थे. प्रतिवाद मार्च झंडा चौक पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया. नेताओं ने कहा कि आज देश में बोलने की आजादी पर पाबंदी लगाने की साजिश हो रही है. इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी गयी.
लंकेश का दक्षिणपंथी संगठनों से भारी मतभेद था और वह हिंदुत्ववादी राजनीति की घोर आलोचक थी. नेताओं ने कहा कि यह आजाद पत्रकारिता पर हमला है. इससे पहले भी कन्नड़ लेखक कलबुर्गी, अंधविश्वास से लड़ने वाले नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पनसारे की हत्या की जा चुकी है. आज देश में जनतंत्र पर लगातार हमला हो रहा है. इसके खिलाफ वामपंथी व प्रगतिशील संगठन संघर्ष जारी रखेगा. मार्च में असीम सरकार, प्रकाश रजक, सुरेंद्र राम, वीरेंद्र यादव, सोनिया देवी, अर्जुन यादव, महेंद्र तुरी, शंभु पासवान, अशोक रजक, राम प्रसाद दास, रवींद्र भारती, महेश सिंह, पुरुषोत्तम यादव, सकिंद्र कुमार, रूपेश राणा, रमेश पासवान, विजय सिंह आदि शामिल थे.
