सामाजिक-धार्मिक व्यवस्थाओं में एकरूपता जरूरी : धर्मगुरु बगरय मुंडा

उलिहातू में सरना धर्म सोतोः समिति का शाखा दिवस सह सरना प्रार्थना सभा का आयोजन

खूंटी. धरती आबा बिरसा मुंडा की धरती उलिहातू में सोमवार को सरना धर्म सोतोः समिति का 14वां शाखा स्थापना दिवस सह सरना प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर सरना स्थल में जेठा पहान, सनिका मुंडा, गोल्गा मुंडा और पांडु मुंडा की अगुवाई में सिङबोंगा की पूजा-पाठ की गयी. इसमें बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा भी शामिल हुये. उन्होंने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने जिस समृद्ध समाज की कल्पना की, वह आज भी अधूरी है. उन्होंने भगवान सिंङबोंगा की पूजा करने की अपील की तथा मूल धर्म सरना को संगठित बनाने का आह्वान किया. धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि सरना की धार्मिक पहचान, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामाजिक-धार्मिक व्यवस्थाओं में एकरूपता जरूरी है. सरना धर्म के प्राचीनतम परंपराओं के कारण समाज अलग-थलग हैं, जिससे समाज को संवैधानिक लाभ, संरक्षण-संवर्धन और पर्व-त्योहारों के छुट्टियों से आज भी वंचित होना पड़ता है. सरना समाज के अस्तित्व एवं अस्मिता बचाए रखने के लिए जातीयता और क्षेत्रीयता से ऊपर उठ कर एकजुट होने की जरूरत है. मौके पर धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया, जीतनाथ पहान, धीरजु मुंडा, मंगल मुंडा, बुधराम सिंह मुंडा, मनोज मंडल, किसुन राय मुंडा, मनाय मुंडा, सुगना मुंडा, बलराम समद, करमु हेमरोम, अनिल गुड़िया, बुधराम मुंडा, राघुनाथ मुंडा, सनिका मुंडा, टुईशा मुंडा, गानसा मुंडा, पांडु मुंडा, मोरा मुंडा, जौनी मुंडा सहित अन्य उपस्थित थे.

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Published by: Chandan kumar

चंदन कुमार ने करियर की शुरुआत 1996 में प्रभात खबर से की. ऑल इंडिया रेडियो, सहारा समय टीवी, इंडिया टुडे एवं राष्ट्रीय सहारा में कार्य अनुभव. यात्रा वृतांत,साहित्य, सामाजिक बदलाव एवं कानूनी मामले की खबरों में रुचि. वर्तमान में मधेपुरा से खबरों का संकलन करते हैं.

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