तोरपा. कोइल कारो जनसंगठन एवं गुड़िया पड़हा के संयुक्त तत्वावधान में पड़हा बगीचा, तपकारा में ‘परंपरागत ग्रामसभा के अधिकार एवं पेसा’ विषय पर कार्यशाला हुई. आयोजन में ‘संवाद’ एवं ‘इंजोत’ संस्था ने सहयोग किया. इसमें गुड़िया, बोदरा, कोनगाड़ी, तोपनो, भेंगरा और कंडुलना पड़हा के विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप कार्यपद्धति संचालित करना पेसा कानून का मूल उद्देश्य है. पड़हा व्यवस्था और पारंपरिक ग्रामसभा में सामंजस्य स्थापित कर संविधान की पांचवीं अनुसूची के अधिकारों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा. जनसंगठन के उपाध्यक्ष जोन जुरसेन गुड़िया ने भू-अभिलेख, विलेज नोट, खेवट, खतियान और जमाबंदी को सामुदायिक अधिकारों का आधार बताया.
समाजसेवी बेनेदिक्त नवरंगी ने पारंपरिक ग्रामसभा की संरचना, दायित्व और महिला भागीदारी पर चर्चा की. गुड़िया पड़हा महामंत्री रेजन गुड़िया ने ग्रामसभा की कार्यवाही संधारण का व्यावहारिक अभ्यास कराया. बोदरा पड़हा के पड़हा राजा संतोष बोदरा ने पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करने में पड़हा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. जेनिफर बाखला ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
मौके पर पड़हा राजा हाबिल गुड़िया, मसीहदास गुड़िया, जुनूल गुड़िया, जोसेफ गुड़िया, जीवन हेमरोम, निकोलस कंडुलना, सुगड़ गुड़िया, अमृत गुड़िया, बर्थोलमियुस गुड़िया, नमजन गुड़िया, संजय कंडुलना, दुलार मुंडा, भजू मुंडा, सुखराम गुड़िया, मदन सिंह, एरियल कंडुलना, विनीता हेमरोम, अनिमा होरो, ओलिभ धान, ग्लोरिया गुड़िया और सोशान्ति गुड़िया सहित अन्य मौजूद थे.
