सावन माह के पावन अवसर पर मुरहू चौक स्थित बजरंगबली मंदिर परिसर में स्थानीय सत्संगियों की ओर से विशेष सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वर स्तुति और गुरु वंदना से हुई. इसके बाद रामचरितमानस का पाठ किया गया. मुख्य वक्ता महर्षि मेंही आश्रम, कुप्पाघाट (भागलपुर) से पधारे स्वामी डॉ. निर्मलानंदजी महाराज ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन माह में भगवान शिव की भक्ति की बयार चारों ओर बहती है. देवों के देव महादेव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. उनकी भक्ति, ध्यान और तपस्या से सभी को सदाचार एवं भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य शरीर प्राप्त होता है. यह शरीर साधना और मोक्ष का द्वार है. जो इस दुर्लभ अवसर का सदुपयोग नहीं करता, वह जीवन का अमूल्य अवसर खो देता है. उन्होंने कहा कि सत्संग से मन निर्मल होता है तथा चिंता, भय और मोह से मुक्ति मिलती है. भगवान श्रीराम के प्रति हनुमानजी की अनन्य भक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. शांति पुरी आश्रम के स्वामी लक्ष्मणजी महाराज ने कहा कि सत्संग का प्रभाव मनुष्य के जीवन को पूरी तरह बदल देता है. सत्संग से कर्कश कौवा भी मधुर कोयल बन जाता है और बगुला हंस के समान गुणवान हो जाता है. उन्होंने कहा कि डाकू रत्नाकर भी नारदजी के सत्संग से महर्षि वाल्मीकि बने. अच्छी संगति से ही मनुष्य परमात्मा की सच्ची भक्ति कर जीवन का उद्धार कर सकता है. कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि ईश्वर की कृपा के बिना संत और सत्संग की प्राप्ति नहीं होती. अनेक पुण्य कर्मों के फलस्वरूप सद्गुरु मिलते हैं, जो मनुष्य के भीतर की बुराइयों को समाप्त कर विवेक का प्रकाश भरते हैं. उन्होंने कहा कि गुरु पर अटूट विश्वास रखने से सुख-समृद्धि और भगवत्कृपा प्राप्त होती है. माता शबरी, मीराबाई, ध्रुव और प्रह्लाद जैसे भक्तों ने भी गुरु की प्रेरणा से भगवान की प्राप्ति की. कार्यक्रम में संजय सत्संगी, राजकुमार, अमित गुप्ता, मिथिलेश गुप्ता, सूरजमल प्रसाद, संतोष गुप्ता, रामहरि साव, सुनील रजक, अजय गुप्ता, धर्मेंद्र ठाकुर सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे.
सावन में सत्संग से मिला भक्ति और सदाचार का संदेश

प्रवचन देते स्वामी | Prabhat Khabar Network
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खूंटी में सावन के अवसर पर आयोजित सत्संग में स्वामी डॉ. निर्मलानंदजी महाराज ने मानव जीवन की महत्ता और भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।