खूंटी. केंद्र सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 को बिना चर्चा के ध्वनि मत से पारित किए जाने के विरोध में झारखंड उलगुलान संघ की केंद्रीय समिति की बैठक डुडरी, मुरहू में हुई. बैठक की अध्यक्षता संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने की. बैठक में विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए इसके खिलाफ रणनीति तैयार की गयी.
झारखंड के लिए अभिशाप यह विधेयक
संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि यह विधेयक झारखंड के लिए अभिशाप साबित होगा. विधेयक के कानून बनने पर झारखंड सरकार को करीब दस हजार करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ेगा. इससे राज्य के विकास और झारखंडियों के हित प्रभावित होंगे.
संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया देश के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है. संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 50 में राज्यों को खनिजों पर कर लगाने का अधिकार दिया गया है. उन्होंने जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा खनिजों पर राज्यों के कर और सेस लगाने के अधिकार से जुड़े फैसले का भी हवाला दिया.
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ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण
बोदरा ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के संदर्भ में समता और वेदांता मामलों के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन में ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होने से पहले भी खदानों से मिलने वाली रॉयल्टी में संबंधित ग्रामसभा के हिस्से पर केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए.
राज्य के हितों की अनदेखी करने पर करेंगे जनांदोलन
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंड सरकार को इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर राज्य हित में प्रस्ताव पारित करना चाहिए और उसे केंद्र सरकार को भेजना चाहिए. संघ ने चेतावनी दी कि राज्य के हितों की अनदेखी होने पर व्यापक जनांदोलन किया जाएगा. बैठक में मसीहदास गुड़िया, जोन जुरसेन गुड़िया, पौलुस हेमरोम, सुबोध पुर्ती, बेनेदिक्त नवरंगी, निरल तोपनो, फूलचंद टुटी, अब्राहम सोय, प्रेम मानकी, जोसेफ हस्सा और शालिनी आईंद सहित अन्य उपस्थित थे.
