बारिश शुरू होते ही टापू बन जाता है खूंटी का डंडोल गांव, 3 महीनों के लिए थम जाती है जिंदगी की रफ्तार

खूंटी का डंडोल गांव बारिश के दौरान टापू बन जाता है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क टूट जाता है। पुलिया के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर गहरा असर पड़ा है।

खूंटी. जिला मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित खूंटी प्रखंड का डंडोल गांव बरसात में टापू बन जाता है. बारिश शुरू होते ही गांव का आसपास के क्षेत्रों से संपर्क कट जाता है. करीब तीन से चार महीने तक ग्रामीणों को आवागमन की समस्या से जूझना पड़ता है. सड़क और पुलिया के अभाव में गांव की जिंदगी की रफ्तार थम जाती है.

नहीं हैं कोई पुलिया और वैकल्पिक रास्ता

डंडोल गांव की आबादी करीब 400 है. अधिकांश ग्रामीण दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दिनों में गांव के समीप बहने वाली कांची नदी का जलस्तर बढ़ जाता है. पुलिया और वैकल्पिक रास्ता नहीं होने के कारण नदी पार करना मुश्किल हो जाता है. इससे ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों से संपर्क टूट जाता है.

पढ़ाई से लेकर इलाज तक पर असर

बरसात में आवागमन बाधित होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है. रास्ता बंद होने से विद्यार्थी कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं. वहीं किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाती है. गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने में ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है.

इलाज के अभाव में मौत

वार्ड सदस्य लच्छू उरांव ने बताया कि पिछले वर्ष उनके भाई की तबीयत खराब हो गयी थी. नदी में पानी अधिक होने के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका. इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गयी. ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में ऐसी घटनाओं का खतरा बना रहता है.

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रोजगार भी होता है प्रभावित

ग्राम प्रधान निकोलस उरांव और ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अधिकांश लोग मजदूरी पर निर्भर हैं. बारिश के दौरान काम पर नहीं जा पाने के कारण परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है. कई बार भोजन की समस्या तक उत्पन्न हो जाती है.

लंबे समय से सड़क और पुलिया की मांग

समाजसेवी यासीन अंसारी ने कहा कि हर वर्ष बारिश के दौरान डंडोल गांव की दिनचर्या पूरी तरह ठप हो जाती है. ग्रामीण लंबे समय से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं. सांसद, विधायक और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हुई है.

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सड़क, पुलिया और अन्य बुनियादी सुविधाएं

सदर कलीम अंसारी ने बताया कि इस वर्ष भी जिला प्रशासन को सड़क और पुलिया निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपा गया है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी. ग्रामीणों का कहना है कि डंडोल जैसे गांवों तक सड़क, पुलिया और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचने के बाद ही बरसात में टापू जैसी स्थिति से मुक्ति मिल सकेगी.


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लेखक के बारे में

By चंदन कुमार

चंदन कुमार ने करियर की शुरुआत 1996 में प्रभात खबर से की. ऑल इंडिया रेडियो, सहारा समय टीवी, इंडिया टुडे एवं राष्ट्रीय सहारा में कार्य अनुभव. यात्रा वृतांत,साहित्य, सामाजिक बदलाव एवं कानूनी मामले की खबरों में रुचि. वर्तमान में मधेपुरा से खबरों का संकलन करते हैं.

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