डकरा : गर्मी में बेतहाशा वृद्धि के बाद एनके एरिया में पानी की समस्या आ गयी है, इससे लोग परेशान हैं. सीसीएल क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र, दोनों जगहों में एक जैसी स्थिति है. चूरी, मानकी, सुभाषनगर कॉलोनी का एक बड़ा हिस्सा पानी के लिए सपही नदी पर आश्रित है. लेकिन सपही नदी का जलस्रोत लगभग सूख चुका है.
चूरी और मानकी पंप हाउस को उतना पानी नहीं मिल पा रहा है, जितनी कॉलोनी में खपत है. इन कॉलोनी में सप्ताह में एक दिन ही पानी मिल पा रहा है. पीने का पानी लोग खरीद कर पी रहे हैं, लेकिन दैनिक कार्यों के लिए पानी नहीं रहने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है. इसके अलावा नदी के किनारे बसे टिकेतरी, मानकी बस्ती, विश्वकर्मा मोड़ जैसे गांव में रहनेवाले लोगों को भी नदी से पानी नहीं मिलने से परेशानी हो रही है.
कुआं, चापानल भी जवाब देने लगा है. मोहननगर, डकरा, केडीएच का बड़ा हिस्सा दामोदर नद पर पानी के लिए आश्रित है. दामोदर नद भी तेजी से सूख रही है. इसके अलावा दामोदर रोहिणी परियोजना का कोयला खदान से लेकर केडीएच, डकरा खदान की गंदगी के साथ-साथ मोनेट डेनियल कोल वाशरी के प्रदूषण से काली हो गयी है. पानी सूखते ही पूरा नद का उपरी हिस्सा काला दिखने लगा है.
आसपास रहनेवाले ग्रामीण रेत खोद कर साफ पानी निकाल लेते हैं, लेकिन मवेशियों को भटकते देखा जाता है. गर्मी के कारण पानी का मोटर जलने की शिकायत भी बढ़ जाती है. जिससे जलापूर्ति सेवा प्रतिदिन बाधित रहता है. श्रमिक नेता शैलेश कुमार बताते हैं कि एनके एरिया में हर साल गर्मी में यही स्थिति रहती है, लेकिन प्रबंधन गंभीरता से कभी कोई कार्रवाई नहीं करता. आजादी के 70 साल बाद भी सीसीएल के इस क्षेत्र में लोगों को शुद्ध पीने का पानी सीसीएल उपलब्ध नहीं करा सकी है.
वहीं चूरी उत्तरी के मुखिया संजय आइंद का कहना है कि सीसीएल ने आसपास के सभी परंपरागत जलस्रोत को भी बर्बाद कर दिया है. हालत में सुधार करने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है, ऐसा नहीं किया गया तो पानी को लेकर क्षेत्र में एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो जायेगा.
