सांसद कड़िया मुंडा ने नयी किस्म की पत्थलगड़ी को बताया राजनीतिक, कहा
खूंटी : जिले में राजनीतिक दृष्टिकोण से पत्थलगड़ी की जा रही है़ जब भी चुनाव आता है, ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं. इतने दिन से पत्थलगड़ी करनेवाले चुप थे़ उनसे पूछना चाहिए कि इसके पीछे उनकी क्या मंशा है़
यह बातें गुरुवार को सांसद कड़िया मुंडा ने अड़की प्रखंड के कोरवा में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में कही. उन्होंने आदिवासी समाज में होनेवाली परंपरागत पत्थलगड़ी की भी जानकारी दी. कहा कि जिले में हो रही पत्थलगड़ी नयी किस्म की है़ आदिवासी समाज में इस तरह की पत्थलगड़ी की परंपरा पहले नहीं थी़
सांसद ने कहा कि सरकार की योजनाएं नहीं लेने से सरकार का ही पैसा बचेगा, लेकिन यह हमारे टैक्स का पैसा है़ हमें सरकार के पैसे से मिलनेवाली योजनाओं का विरोध नहीं करना चाहिए़
अगर सरकार की योजनाएं ठीक से नहीं चल रही है, तो उसका विरोध हो. उन्होंने कहा कि देश में सबसे अधिक आदिवासी विधायक व सांसद भाजपा के ही हैं और पत्थलगड़ी आंदोलन उनके ही क्षेत्रों में चलाया जा रहा है़ यह साफ तौर पर 2019 में होनेवाले चुनाव की तैयारी है़ सांसद ने कहा कि पत्थलगड़ी में संविधान की धाराएं लिखी जाती है, लेकिन उसमें सिर्फ पत्थलगड़ी करनेवालों की मतलब की बातें होती है़
पूरी धारा नहीं लिखी जा रही है़. श्री मुंडा ने कहा कि सरकारी स्कूलों को बंद करने की बात की जा रही है, लेकिन मिशन स्कूल को बंद करने के बारे में नहीं बोला जाता है़ जबकि मिशन स्कूल भी सरकार के अनुदान से संचालित होता है़ उन्होंने खुले तौर पर कहा कि पुराने धर्म वाले आदिवासियों को शिक्षा और विकास से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे लोग हमें पिछड़ा बनाये रखना चाहते हैं. उनका मूल विचार यही है़
ग्रामीणों ने रखी समस्याएं : जनसंवाद में ग्रामीणों ने अपनी समस्या रखी. अड़की-बीरबांकी पथ के निर्माण की मांग की़ इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल की समस्या भी उठायी. ग्रामीणों ने नयी किस्म की पत्थलगड़ी व उससे उपजी समस्याओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की़ कहा कि जहां विकास नहीं पहुंचा है, वहीं पत्थलगड़ी की जा रही है़
लोग गुमराह हो रहे हैं. इस पर सांसद ने कहा कि अड़की-बंदगाव भाया बीरबांकी-कोचांग के लिए सड़क बनेगी. डीपीआर तैयार कर लिया गया है़.
पहली बार कोरवा पहुंचे थे सांसद : 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद कड़िया मुंडा पहली बार अड़की प्रखंड के कोरवा गांव पहुंचे़ उन्होंने इस बात को खुद स्वीकार किया़ इसे लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहले भी मैं आना चाहता था, लेकिन ग्रामीण तैयार नहीं थे़ अब बुलाया, तो मैं चला आया़ उन्होंने कहा कि बीरबांकी व कोचांग में भी बुलाया जायेगा, तो जरूर जाऊंगा.
